न महफिल न जुलूस पूरी सादगी के साथ गमगीन माहौल में ताजिए किए सुपुर्द -ए -खाक

न महफिल न जुलूस पूरी सादगी के साथ गमगीन माहौल में ताजिए किए सुपुर्द -ए -खाक

कायमगंज / फर्रुखाबाद :जंगे कर्बला के बाद बताया जाता है कि इंसानियत एक बार फिर इस दुनिया में सीना तान कर इस्लाम के रूप में काबिज हुई ।यह सिलसिला अमन और भाईचारा वालों के लिए आज भी इंसानियत का पैगाम दे रहा है । इसी रस्म -ओ -रिवाज को आगे तक ले जाने के लिए

कायमगंज / फर्रुखाबाद :जंगे कर्बला के बाद बताया जाता है कि इंसानियत एक बार फिर इस दुनिया में सीना तान कर इस्लाम के रूप में काबिज हुई ।यह सिलसिला अमन और भाईचारा वालों के लिए आज भी इंसानियत का पैगाम दे रहा है । इसी रस्म -ओ -रिवाज को आगे तक ले जाने के लिए हर वर्ष इस्लामिक कैलेंडर द्वारा तय समय पर ताजिए रखे जाते हैं ।

पूरी शिद्दत व इबादत तथा तबर्रुक तकसीम के साथ गमगीन माहौल में कर्बला ले जाकर सुपुर्द- ए- खाक किए जाते हैं । किंतु इस साल कोरोना प्रोटोकॉल के कारण पूरी सादगी के साथ केवल पांच शिद्दत पसंद लोगों की टोली ने कर्बला ले जाकर ताजियों को सुपुर्द- ए- खाक किया। हालांकि भीड़ भाड़ नहीं थी ,और नहीं ,किसी तरह की हलचल, किंतु फिर भी इस मौके पर जो चंद लोग कर्बला की ओर कूच कर रहे थे।

उनकी तथा अपने -अपने घरों पर मौजूद लोगों की आंखें नम होने के कारण उनके गमजदा होने का एहसास करा रही थी। कायमगंज नगर के मोहल्ला चिलांका, चिलौली ,जटवारा मेन चौराहा एवं गांव कुबेरपुर, गढ़ी, लालबाग ,मऊ रशीदाबाद ,कटरा रहमत खां,अताईपुर, रायपुर ,कंपिल ,कुआं खेड़ा वजीर आलम खां आदि से पूरी रस्मो रिवाज के साथ ताजिए सुपुर्द -ए -खाक किए गए।

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रिपोर्ट:दानिश खान

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