नहीं रहे मशहूर पान मसाला कारोबारी विक्रम कोठारी

नहीं रहे मशहूर पान मसाला कारोबारी विक्रम कोठारी

नहीं रहे मशहूर पान मसाला कारोबारी विक्रम कोठारी


कानपुर। शहर के चर्चित कारोबारी व  रोटोमैक ग्रुप के प्रबंध निदेशक विक्रम कोठारी बीमारी के चलते निधन हो गया। उनके निधन खबर मिलते ही शहर के कई बड़े कारोबारी उनके आवास पहुंचे।

मंगलवार की सुबह पहले से बीमार चल रहे विक्रम कोठारी  को दिल का दौरा पड़ने पर नौकरों ने परिजनों को सूचना देकर अस्पताल ले जाने की तैयारी थी पर पर उससे पूर्व ही उनका निधन हो गया। पान मसाला का कारोबार करने वाले विक्रम कोठारी ने रोटोमैक पेन लांच करके कंपनी की शुरूआत की थी। उनका नाम बड़े कारोबारियों में शुमार था। वह आयात निर्यात के कारोबार से भी जुड़े हुए थे और 1999 में पारिवारिक बंटवारे के बाद पान पराग से अलग हुए थे। 

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वर्ष 1997 में प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्यातक के रूप के अवार्ड से नवाजा गया था। उन्होंने रोटोमैक कंपनी 1995 में शुरू की थी और अगले 10 वर्ष में कंपनी 100 करोड़ की हो गई थी। विक्रम कोठारी इसे 20000 करोड़ की कंपनी बनाना चाहते थे। वह पत्नी साधना और बेटे राहुल कोठारी समेत परिवार के साथ कानपुर के तिलक नगर स्थित बंगले में रह रहे थे। मंगलवार को वह घर में अकेले थे और पत्नी व बेटा लखनऊ गए हुए थे। सुबह नौकरों ने उन्हें अचेत पाया और डॉक्टर को बुलवाया। इससे पहले उनका निधन हो गया, हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु होने की बात कही जा रही है। 

बताया गया है कि बीते मार्च माह में ब्रेन हैमरेज होने पर भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कानपुर से एयर एंबुलेंस से उन्हें लखनऊ शिफ्ट किया गया था, जहां अपोलो अस्पताल में उन्हें आइसीयू में रखा गया था। उस समय भी वह घर में गिरकर अचेत हो गए थे। बता दे कि बैंकों के करोड़ों रूपये के फ्राड मामले में उन्हें कई दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। 
 

बारातियों का स्वागत पान पराग...

 80  के दशक में  टीवी पर ये पंच लाइने लगभग हर किसी ने सुनी होगी इसके साथ ही कानपुर में पान मसाले के कारोबार को खड़ा करने वाले उद्योगपति विक्रम कोठारी देश-दुनिया में पेन किंग के नाम से भी मशहूर हुए थे। पिता की पान पराग कंपनी से अलग होकर रोटोमैक कंपनी बनाई और पेन लांच किया। 

रोटोमैक पेन ही नहीं उसका स्लोगन- लिखते लिखते लव हो जाए... सभी को रट गया था। विक्रम कोठारी ने पान पराग से शोहरत पाई थी, जिसका स्वाद और स्लोगन- बरातियों का स्वागत पान पराग से करिए लोगों की जुबां पर छा गया था। पिता के साथ पान पराग को बुलंदियों पर पहुंचाया शहर की बड़ी हस्तियों में शुमार कोठारी परिवार के प्रमुख उद्योगपति मनसुख भाई कोठारी पान मसाला बनाने की शुरूआत की थी, जिसमें उनके बड़े बेटे विक्रम कोठारी का खासा सहयोग रहा। वर्ष 1970 के आसपास पिता के साथ मिलकर विक्रम कोठारी की मेहनत से पान पराग देश-दुनिया में छा गया और हर जुबां पर पान पराग सुनाई देने लगा। 

रिपोर्ट : शाहिद पठान

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