सरकारी काम में अनोपचारिक बर्ताव पड़ा भारी

सरकारी काम में अनोपचारिक बर्ताव पड़ा भारी

भोपाल: आधिकारिक और खासकर सरकारी प्रक्रिया में निजी मामलों को लाना कितना महंगा पड़ सकता है, यह हाल ही में हुई एक घटना को देखकर जाना जा सकता है। मामला भोपाल का है जहां एक सरकारी कर्मचारी को अपने अनुशासनहीन और अव्यवसायिक बर्ताव का खामियाजा भुगतना पड़ा है। दरअसल, भोपाल ट्रैफिक पुलिस में पदस्थ एक

भोपाल: आधिकारिक और खासकर सरकारी प्रक्रिया में निजी मामलों को लाना कितना महंगा पड़ सकता है, यह हाल ही में हुई एक घटना को देखकर जाना जा सकता है। मामला भोपाल का है जहां एक सरकारी कर्मचारी को अपने अनुशासनहीन और अव्यवसायिक बर्ताव का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

दरअसल, भोपाल ट्रैफिक पुलिस में पदस्थ एक कॉन्स्टेबल ने अपने साले की शादी में जाने के लिए अपने सीनियर पुलिस उप-निरीक्षक ट्रैफिक को एक अजीबो गरीब प्रार्थना पत्र लिख डाला।

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कॉन्स्टेबल दिलीप अहिरवार छुट्टी पर जाना चाहता थे। जिसके लिए उसने आवेदन लिख अपने रिपोर्टिंग बॉस पुलिस उप निरीक्षक ट्रैफिक संदीप दीक्षित को भेजा। इसमें उसने लिखा कि 5 दिन विशेष अवकाश चाहते है, लेकिन पत्र में लिखी एक विशेष टिप्पणी पर बवाल हो गया। दिलीप अहिरवार ने ओपचारिक पत्र में यह भी लिख दिया कि उसकी बीवी ने कहा है कि अगर वह उसके भाई की शादी में नहीं आया तो परिणाम अच्छा नहीं होगा।

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इस टिप्पणी की वजह से कॉन्स्टेबल छुट्टी रिजेक्ट कर दी गई। साथ ही साथ पुलिस उप-निरीक्षक (ट्रैफिक) का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने कॉन्स्टेबल को छुट्टी देने की जगह लाइन अटैच कर दिया। कॉन्स्टेबल पर आरोप है कि वह काफी छुट्टियों पर रहता है। उसने सालभर में मिलने वालीं छुट्टियां पहले ही खत्म कर दी थीं।

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