क्षेत्र में धधक रहे भट्ठों से सारे जवाबदेह महरूम तो ! कौन उठाएगा कार्यवाही की जिम्मेदारी

क्षेत्र में धधक रहे भट्ठों से सारे जवाबदेह महरूम तो ! कौन उठाएगा कार्यवाही की जिम्मेदारी

मानक पैमानों के अनुसार किसी भी ईंट भट्ठे के संचालन के लिए प्रदूषण विभाग के साँथ सांथ राजस्व के मुखिया की अनुज्ञा आवश्यक होता है सांथ ही कोयले के क्रय-विक्रय के वैधानिक दस्तावेज सम्बंधित विभाग के उपलब्ध होने चाहिए किन्तु यहाँ सारे पैमाने और मापदंड जमीनी स्तर पर नाकाफी साबित हो रहे हैं शहडोल(मध्य प्रदेश)।।

  • मानक पैमानों के अनुसार किसी भी ईंट भट्ठे के संचालन के लिए प्रदूषण विभाग के साँथ सांथ राजस्व के मुखिया की अनुज्ञा आवश्यक होता है सांथ ही कोयले के क्रय-विक्रय के वैधानिक दस्तावेज सम्बंधित विभाग के उपलब्ध होने चाहिए किन्तु यहाँ सारे पैमाने और मापदंड जमीनी स्तर पर नाकाफी साबित हो रहे हैं

शहडोल(मध्य प्रदेश)।। शहर में ईंट भट्ठों का व्यवसाय इन दिनों चरम पर है जिसकी जानकारी न तो स्थानीय थानों को है और न ही राजस्व को, भट्ठों के संचालन में चारो ओर चोरी के कोयले की खेप लग रही है जिसमे करकटी क्षेत्र में भी यह कारोबार इन दिनों जोरो पर है ज्ञात हो खैरहा थाना क्षेत्र अन्तर्गत सोहन नामक शख्स चोरी के कोयले से लाखों से ज्यादा ईंट भट्ठे का संचालन कर रहा है जिसमे बिना किसी पंजीयन व राजस्व रॉयल्टी के ईंट बिक्री की जा रही है।

थाने में 5000 की पेशगी क्या करेंगे जिम्मेदार

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सोहन नामक शख्स का कहना है कि बिना किसी की जानकारी के इतना बड़ा काम कैसे हो सकता है रही बात कोयले की खैरहा थाने में मेरे द्वारा 5000 रु भी दिया जाता है तो किस बात की कार्यवाही जानकारों की मानें तो खैरहा थाना क्षेत्र के दर्जनो भट्ठा व्यवसाईयो का कहना है कि इस बार भट्ठे के कारोबार में इस बार थाने की पेशगी पिछली बार से ज्यादा वजनदार होगा अब ऐसे में यह कितना सत्य है कहा नही जा सकता पर सोहन जैसे व्यवसाईयो के बड़े कारोबार को देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कहीं न कहीं खाकी के जिम्मेदारों को इनको मूक स्वीकृति दी गई है जिससे व्यापक पैमाने पर कोयले के चोरी की खेप भट्ठों में खप रही है *बाल श्रम नियोजित और सुरक्षा भी निष्क्रिय*क्षेत्रो में लगने वाले सैकड़ो भट्ठों में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नियोजित किया जाता है जो न सिर्फ उनके निजता का हनन है बल्कि शासन द्वारा पारित बालश्रम निषेध कानून भी हवा में प्रतीत हो रहे हैं बालश्रम कानून तो भट्ठों में शिथिल प्रतीत हो रहे ही हैं सांथ ही जिले में बैठे श्रम कार्यालय भी इसके दायरे से दूर है भट्ठों में कार्यरत सैकडो मज़दूरो का न तो कोई पंजीयन रहता है और न ही कोई जीवन सुरक्षा योजना ऐसे में कई बार इन भट्ठों में कार्यरत मजदूरों के सांथ आकस्मिक घटनाएँ भी घटित होती रहती हैं जिसकी जानकारी भट्ठा संचालक स्थानीय जिम्मेदारों को किंचित भी नही होने देते ।

हवा में उड़ रहे प्रदूषण के नियम

नियमतः भट्ठों से निकलने वाले धुओं से न सिर्फ आसपास के क्षेत्र प्रदूषित होते हैं अपितु इसका परोक्ष प्रभाव वातावरण पर भी जाता है जिसका सुध प्रदूषण कार्यालय में बैठे जिम्मेदार भी नही लेते व्यापक पैमानों में चल रहे ईंट भट्ठों के लिए नियमानुसार बड़े स्तर पर चिमनियां तैयार की जाती है जिससे धुएं का प्रभाव सुदूर वायु पर जाकर विस्तारित हो किन्तु सैकड़ो भट्ठों में शायद किसी एक भट्ठे में इन नियमो का पालन हो रहा हो।

जंगलों में भी लग रहे भट्ठे,विभाग की मौन स्वीकृति

जानकारों की मानें तो दर्जनो भट्ठे का संचालन जंगलों में संचालित हो रहे हैं किंतु विभाग के कारिंदों द्वारा इन बातों को दरकिनार कर मैनेजमेंट का खाका तैयार कर लिया जाता हैं और शासन द्वारा बनाए गए वन विभाग कानून के सारे कायदो को बलि चढ़ा दिया जाता है ।

खनिज निष्क्रिय और कोयले की चोरी चरम पर

जिले में अरसों से हो रहे रेत और कोयले की चोरी को खनिज के आलाकमान रोकने में तो असफल हुए ही हैं सांथ ही भट्ठों में खप रहे रोजाना टनों कोयले का भी खनिज के पास कोई हिसाब किताब नही है ऐसे में यह कह पाना सहज ही होगा कि सारे जिम्मेदार अपनी-अपनी जिम्मेदारी से महरूम हैं।

  • रिपोर्ट :- अविनाश शर्मा

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