अस्पताल में औचक निरीक्षण में कमियां मिलने पर हुआ सील , अस्पताल संचालकों पर भी मामला दर्ज

अस्पताल में औचक निरीक्षण में कमियां मिलने पर हुआ सील , अस्पताल संचालकों पर भी मामला दर्ज

मध्य प्रदेश (राजगढ़):- जिला राजगढ़ में खुजनेर रोड पर संचालित सी.एच.एल. (एम.डी.) अस्पताल एवं ट्रामा सेन्टर मामले में कलेक्टर राजगढ़ द्वारा गठित संयुक्त जांच दल के प्रतिवेदन पर पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। उक्त बिना अनुमति जारी अस्पताल में अनियमितताओं एवं अवैध रूप से बिना अनुमति अस्पताल संचालित कर लोगों की जान से

मध्य प्रदेश (राजगढ़):- जिला राजगढ़ में खुजनेर रोड पर संचालित सी.एच.एल. (एम.डी.) अस्पताल एवं ट्रामा सेन्टर मामले में कलेक्टर राजगढ़ द्वारा गठित संयुक्त जांच दल के प्रतिवेदन पर पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। उक्त बिना अनुमति जारी अस्पताल में अनियमितताओं एवं अवैध रूप से बिना अनुमति अस्पताल संचालित कर लोगों की जान से खिलवाड़ करने के संबंध में जिला दण्डाधिकारी नीरज सिंह को प्राप्त शिकायत पर कार्यवाही करते हुए जिला स्तरीय टीम गठित की गई थी। जिनके द्वारा उक्त अस्पताल का औचक निरीक्षण कर अनियमितताओं संबंधी शिकायत सही पाये जाने से अस्पताल सील किया गया एवं अस्पताल प्रबंधन पर वैधानिक कार्यवाही करने के संबंध में थाना कोतवाली में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है।
            
जिला कलेक्टर द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच करने के विशेष निर्देष दिये गये थे वहीं अनुविभागीय दण्डाधिकारी राजगढ़ पल्लवी वैद्य द्वारा एक लेखी आवेदन पत्र मय जांच प्रतिवेदन के थाना कोतवाली को प्रस्तुत किया गया था जिसमें सी.एच.एल. (एम.डी.) अस्पताल एवं ट्रामा सेन्टर के पार्टनर विनोद शर्मा, साहिल उद्दीन एवं तनवीर वारसी द्वारा अवैध एवं अनाधिकृत रूप से अस्पताल संचालित करने, विनोद शर्मा एवं साहिलउद्दीन द्वारा अवैध तरीके से ईलाज करने के संबंध में प्राप्त शिकायत की जांच करने उपरांत सी.एच.एल.(एम.डी) अस्पताल खुजनेर रोड जिला राजगढ के पार्टनर विनोद शर्मा, साहिल उद्दीन एवं तनवीर वारसी सहित अस्पताल में कार्यरत् अन्य सदस्य, दवा विक्रेता, दवा दुकान के संचालक/प्रोपराईटर एवं दवा दुकान के फार्मासिस्ट के विरुद्द थाना कोतवाली राजगढ़ में अपराध क्रमांक 260/2021 धारा 177, 186, 188, 269, 304 (2), 369, 336, 417, 34. 120 (बी) भादवि एवं धारा 10 म.प्र. उपचार्यग्रह तथा राजोपचार तथा संबंधी स्थापनाएँ (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन अधीनियम 1973), म.प्र. मेडीकल काउंसलिंग एक्ट 1997, ड्रग कॉस्मेटिक एक्ट 1972 (संशोधित) जीव चिकित्सा अवशिष्ट अधिनियम 2016, धारा 4 जन्म मृत्यू पंजीयन 1969 के तहत पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना में लिया गया।

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उल्लेखनीय है कि जिला दण्डाधिकारी कार्यालय में प्राप्त षिकायत पर गठित टीम द्वारा जांच की गई थी, प्रस्तुत प्रतिवेदन में शिकायतकर्ता अजय नकवाल स्टेनो टाईपिस्ट कलेक्टोरेट राजगढ द्वारा प्रस्तुत शिकायत में अवगत कराया गया था कि सीएचएल (एम.डी.) अस्पताल एवं ट्रामा सेन्टर खुजनेर रोड राजगढ द्वारा लापरवाही पुर्वक तरीके से बिना ट्रेन्ड स्टाफ की सुविधाओं के उसकी पत्नी के प्रसव करने से प्रसव के दौरान उसके बच्चे की मृत्यु हो गई, जिला दण्डाधिकारी राजगढ़ के आदेष पर गठित जांच कमेटी द्वारा श्री अजय नकवाल के द्वारा प्रस्तुत शिकायत में दर्षित बिन्दुओ पर जांच करने उपरांत अस्पताल प्रबंधन द्वारा अनाधिकृत चिकित्सकों/कर्मचारियों एवं दवा विक्रेता इत्यादि के माध्यम से बिना किसी वैध अनुमति के नर्सिग होम का संचालन कर मरीजो का बिना किसी आधिकारिता/विशेषज्ञता तथा प्रशिक्षण के लापरवाही तथा उपेक्षापूर्ण तरीके से मरीजो का ईलाज कर मरीजो के जीवन से खिलवाड किया जाना तथा ईलाज के दौरान विगत लगभग एक महीने में 04 -05 बच्चों की प्रसव के दौरान मृत्यु होना पाया गया।
               

अस्पताल प्रबंधन द्वारा अनुज्ञापन अधिकारी को असत्य एवं भ्रामक जानकारी देकर नर्सिंग होम संचालन की अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया गया, ओपीडी के ईलाज की अनुमति होने के पश्चात भी प्रसव आइसीयू/आइक्युडी मरीजों का ईलाज करना पाया गया अस्पताल में न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव पाया गया, अवैध रूप से शासकिय संपत्ती का उपयोग किया जाना पाया गया, मरीजों से अतार्किक एवं अधिक राशी लेना पाया गया, मरीजों को पावती नहीं देने एवं अवैध तरीके से दवा दुकान संचालित करने, बायोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंध नही किया जाना पाया गया।
            

अस्पताल में जन्म मृत्यु का रिकॉर्ड नहीं किया जाना पाया गया, एमपी मेडीकल काउंसिलिंग एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करना पाया गया अस्पताल प्रबंधन द्वारा निरीक्षण मे कोई सहयोग प्रदान नहीं किया गया, वांछित दस्तावेज भी प्रदान नही किये गये, अस्पताल प्रबंधन/पार्टनर, अस्पताल के समस्त कर्मचारियों, दवा दुकान संचालक, दवा विक्रेता फार्मेसिस्ट, शासकीय दाई द्वारा गिरोह के रूप मे कार्य कर मरीजो का अधिकारिता रहित तरीके से उपेक्षापूर्ण एवं लापरवाही से ईलाज कर मरीजो के जीवन से खिलवाड करने एवं कई नवजात शिशुओ की मृत्यु कारित करना पाया गया। इसके साथ ही कोविड नार्म्स के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन के तथा जिला प्रशासन के द्वारा जारी निर्देशों एवं सी.आर.पी.सी. 144 के तहत पारित आदेशों की अवेहलना करने एवं एमपी मेडीकल काउंसिलिंग एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करना पाये जाने पर उपरोक्त आरोपियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
          
मामले की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया है । टीम द्वारा आरोपियों पर उचित ईनाम घोषित कराये जाकर तीव्र विवेचना कर आरोपियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

रिपोर्ट : कमल चौहान

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