घर उजार कर बना रहे रास्ते लोगों ने किया विरोध।

घर उजार कर बना रहे रास्ते लोगों ने किया विरोध।

मधुबनी बिहार:- एंकर-पिछले साल जयनगर के कमला नदी में आयी प्रलयकारी बाढ़ के कारण प्रखंड के बेलही पश्चिमी पंचायत के बेतौंहा और अकौन्हा गांव स्थित कमला नदी के पश्चिमी और पूर्वी तटबंध कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया। आवागमन बहाल करने के लिए विभागीय स्तर पर ध्वस्त तटबंध मरम्मती का काम युद्ध स्तर पर कराया

मधुबनी बिहार:- एंकर-पिछले साल जयनगर के कमला नदी में आयी प्रलयकारी बाढ़ के कारण प्रखंड के बेलही पश्चिमी पंचायत के बेतौंहा और अकौन्हा गांव  स्थित कमला नदी के पश्चिमी और पूर्वी तटबंध कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया। आवागमन बहाल करने के लिए विभागीय स्तर पर ध्वस्त तटबंध मरम्मती का काम युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है, लेकिन विगत कई वर्षों से तटबंध किनारे बसे दर्जनों भूमिहीन दलित परिवारों को निर्माण एजेंसी के द्वारा निर्माण स्थल से घर उजाड़ने का आदेश दिया गया है।
निर्माण एजेंसी के आदेश को लेकर लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
जयनगर प्रखंड के बेलही पश्चिमी पंचायत के बेतौंहा गांव के वार्ड नंबर सात निवासी लक्षमेश्वर पासवान, राम चन्द्र पासवान, विष्णुदेव पासवान, हिरा पासवान, श्याम पासवान, विशेश्वर पासवान, उमेश पासवान, झपसी पासवान, गंगा पासवान, दिलीप पासवान, खुशी लाल पासवान, देवू पासवान, राज कुमार पासवान, गोविंद पासवान गुरु पासवान, करण पासवान, शम्भु पासवान, राम दयाल पासवान, राम प्रकाश पासवान, छोटन पासवान एवं राम विलास पासवान समेत दर्जनों की संख्या में ग्रामीणों ने बताया कि तीस साल पहले हम लोग कमला नदी के तटबंध के भीतर भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप घर बना कर परिवारों के साथ किसी तरह गुजर बसर करते थे। लेकिन सन् 1987ई० में कमला नदी में आयी प्रलयकारी बाढ़ के कारण पूरा गांव बाढ़ से पूरी तरह से प्रभावित हुआ और भारी नुकसान पहुंचा। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आये मधुबनी जिले के तत्कालीन जिला समाहर्ता अशोक कुमार सिंह ने तटबंध के भीतर फंसे सभी गाँव के लोगों को नाव के सहारे निकाल कर कमला नदी के पूर्वी तटबंध किनारे बेतौंहा गांव के वार्ड नंबर सात में सरकारी जमीन पर बसाने का काम किया। लेकिन पिछले साल एक बार पुनः कमला नदी में आयी प्रलयकारी बाढ़ के कारण बेतौंहा गांव तक जाने वाली मुख्य तटबंध चार अलग अलग जगहों पर ध्वस्त हो गया।
ध्वस्त तटबंध की मरम्मती को लेकर इन दिनों कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।
इसी क्रम में ध्वस्त तटबंध के समीप दो दर्जन से अधिक परिवारों को निर्माण एजेंसी के द्वारा सभी को सरकारी जमीन से घर हटाने का आदेश दिया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में एक पदाधिकारी हम सभी को जमीन नहीं रहने पर बसा रही है, और दूसरी ओर तटबंध मरम्मती को लेकर सभी भूमिहीन परिवारों को मकान तोड़ने का आदेश दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि सभी भूमिहीन परिवार दलित वर्ग से आते हैं, और सरकार के द्वारा पूर्व में सभी को इंदिरा आवास योजना का लाभ दिया जा चुका है। पंचायत के सरपंच शत्रुधन बेराजी ने बताया कि सरकार को गरीबों व भुमिहीन परिवारों को बसाना चाहिए न कि उजारना चाहिए। सरकार अगर इन भुमिहीन परिवारों को हटाती है, तो हटाने से पहले सभी परिवारों को विस्थापित किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट – शादाब अख़्तर

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