मोदी के बाद योगी ? संघ को उत्तराधिकारी मिल गया ?

मोदी के बाद योगी ? संघ को उत्तराधिकारी मिल गया ?

इसमें कोई शक नहीं कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेश (कई देशों से बड़ा क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों लिहाज से) में लगातार दूसरी बार जबरदस्त बहुमत के साथ जीत का जश्न मनाना ही चाहिए...फिर भी बीजेपी ने आज जिस अंदाज़ में योगी का शपथ ग्रहण समारोह मनाया...इसे भव्य बनाने में जिस तरह पूरी ताकत झोंक दी...बीजेपी ही नहीं..एनडीए के मुख्यमंत्री, फिल्म स्टार्स और बिजनेसमैनों को जिस तरह न्योता दिया गया...लखनऊ के वाजपेयी स्टेडियम में जिस तरह ऐतिहासिक भीड़ जुटाई गई..उसके बाद ये सवाल तो बनता है कि क्या योगी को संघ अब मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहा है ?
देशभर से साधु-संत बुलाए गए...प्रदेश के सभी मंदिरों में घंटियां और शंख बजाए गए..पूरे लखनऊ के पोस्टरों से पाट दिया गया..शपथ ग्रहण के लाइव टेलीकास्ट के लिए जिस तरह जगह-जगह LED के इंतजाम किए गए थे...उससे इतना तो साफ है कि योगी आदित्यनाथ बीजेपी के लिए सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं रह गए हैं बल्कि उससे आगे की चीज हो गए हैं...खास बात ये है कि योगी इस पोजिशन पर किसी के रहमोकरम से नहीं बल्कि अपने काम से पहुंचे हैं...यूपी चुनाव में जीत के लिए मोदी ने भी मेहनत की लेकिन इसके साथ ही बड़ा सच ये भी है कि चुनाव योगी के नाम और काम पर लड़ा गया था..चुनाव जिताने वाले 2 बड़े ट्रंप कार्ड्स में से अगर फ्री राशन मोदी सरकार की देन था तो लॉ एंड ऑर्डर योगी की उपलब्धि था..हिंदुत्ववादी नेता की इमेज और गुजरात मॉडल ही मोदी को केंद्र में लेकर आए...योगी की भी छवि तो और भी फायर ब्रांड हिंदुत्व लीडर की थी...लेकिन उन्हें प्रशासक के तौर पर खुद को साबित करना था...योगी अब वो कर चुके...यही वजह है कि योगी की छवि और जनता में उनके क्रेज की वजह से देशभर से मोदी के बाद जिस नेता को चुनाव प्रचार में बुलाने की सबसे ज्यादा डिमांड की जाती है...वो योगी ही हैं...
अगर मुसलमानों को छोड़ दिया जाए तो यूपी में सभी धर्म औऱ समुदाय के लोगों का साथ योगी को मिला है...उम्र भी योगी के साथ है...मोदी ने बीजेपी में सक्रिय राजनीति के लिए 75 साल की जो डेडलाइन सेट की थी..3 साल में मोदी वहां तक पहुंच जाएंगे...फिर भी अगर वो 2024 का चुनाव जीत जाते हैं और 2029 तक प्रधानमंत्री बने रहते हैं..तब भी योगी के लिए रास्ता खुला हुआ है...योगी की उम्र 50 के आसपास है...हालांकि अमित शाह भी 57 के ही हैं लेकिन खराब सेहत उनकी राह में बड़ा रोड़ा है..इसके अलावा एंटी सीएए प्रोटेस्ट, शाहीनबाग, दिल्ली दंगे, बंगाल हिंसा ने अमित शाह की स्वयंभू चाणक्य वाली छवि तोड़ दी है..ऐसे में आज जिस तरह बीजेपी ने योगी के शपथ ग्रहण को एतिहासिक बनाने की कोशिश की...उससे साफ है कि बीजेपी में योगी का कद बढ़ा है...बीजेपी और संघ का कैडर तो पहले ही योगी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान रहा है...आज लखनऊ में शपथ ग्रहण के साथ ही ये क्लियर हो गया कि अब बीजेपी और संघ भी योगी को भविष्य में बड़ी भूमिका में देख रहे हैं...हालांकि राजनीति में सब कुछ अनिश्चित है...लेकिन बावजूद इसके इतना तो कहा जा सकता है कि योगी अब सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं रहे...अब वो दिल्ली की गद्दी के दावेदार भी हो गए..
- DEEPAK JOSHI

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