महाराष्ट्र को भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाए नई सरकार! –अभिरंजन कुमार

महाराष्ट्र को भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाए नई सरकार! –अभिरंजन कुमार

ऐसा शायद इतिहास में कभी न हुआ होगा, जैसा पालघर में हुआ, कि स्वयं पुलिस वालों ने दो संन्यासियों को हत्या किये जाने के लिए उन्मादी भीड़ के हवाले कर दिया। - बॉलीवुड को अपनी बपौती समझने वाले इन लोगों ने केवल वैचारिक असहमति के कारण गैरकानूनी रूप से अभिनेत्री कंगना रनौत का घर भी ढहा दिया। -. देश के अनेक हिस्सों में "सर तन से जुदा" जैसे खौफनाक नारे लगाने वाले उग्र प्रदर्शनों से इन्हें समस्या नहीं होती, लेकिन महज हनुमान चालीसा पाठ का एलान करने के कारण निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति को जेल में डाल दिया।

महाराष्ट्र में बनने जा रही नई सरकार इस लिहाज से खास होगी, क्योंकि इसकी गुंजाइश तब बनी है, जब डंके की चोट पर किसी सरकार को हिंदू-विरोधी कहकर गिरा दिया गया है। शिवसेना के बागी विधायकों ने अघाड़ी सरकार को गिराने के पीछे एकमात्र मुख्य दलील ही यह दी है कि निवर्तमान सरकार हिंदू-विरोधी थी और उसका नेतृत्व करने वाली शिवसेना भी बाला साहेब के हिंदुत्व के रास्ते से भटक गई थी।

इस परिप्रेक्ष्य में, हिंदू-विरोधी सरकार चलाने का दाग धोने के लिए उद्धव ठाकरे ने जाते-जाते अपनी आखिरी कैबिनेट मीटिंग में औरंगाबाद और उस्मानाबाद जिलों के नाम बदलने का प्रस्ताव पास करा लिया।
इसके बाद कम से कम इतने पर तो अवश्य सहमत हुआ जा सकता है कि उद्धव ठाकरे आस्था से कथित हिन्दू ही हैं, लेकिन कथित हिंदू-विरोधियों की चरण-पादुका पूजने को वे तैयार हुए तो, केवल सत्ता-सुख भोगने के लिए! भारत में मुगलों के लिए लाल दरी बिछाने वाले राजा-महाराजा भी ऐसे ही कथित आस्थावान हिंदू हुआ करते थे।
यहां यह बात भी ध्यान देने की है कि 2019 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र ने जनादेश भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने के लिए दिया था, क्योंकि इन दोनों का चुनाव पूर्व गठबंधन था। फिर भी उद्धव ठाकरे की महत्वाकांक्षा को उकसाकर कांग्रेस और एनसीपी ने जनादेश का अपहरण करते हुए अघाड़ी सरकार बना ली, जिसके तौर-तरीकों से शिवसेना विधायकों के भीतर धीमे-धीमे रोष पनपता रहा।
उद्धव सरकार के ढाई साल महाराष्ट्र के लोकतंत्र में काले अध्याय की तरह दर्ज होंगे, जिसमें भ्रष्टाचार और दमन ने सारी हदें लांघ डाली थीं।
1. खुद राज्य सरकार के मंत्रियों और राज्य के बड़े-बड़े अफसरों को मंथली टारगेट देकर राज्य की नागरिकों और व्यापारियों से अवैध असूली के काम पर लगा दिया गया था।
2. सत्ता में बैठे लोगों और उनके एजेंट अफसरों का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि देश के सबसे बड़े उद्योगपति को डराने के लिए उसके घर के बाहर विस्फोटकों से भरी गाड़ी रखवा दी गई।
3. ऐसा शायद इतिहास में कभी न हुआ होगा, जैसा पालघर में हुआ, कि स्वयं पुलिस वालों ने दो संन्यासियों को हत्या किये जाने के लिए उन्मादी भीड़ के हवाले कर दिया।
4. पालघर में संन्यासियों की पुलिस-प्रायोजित मॉब लिंचिंग का विरोध जब वरिष्ठ पत्रकार/संपादक अर्णब गोस्वामी ने अपने चैनल पर किया, तो उन्हें अनैतिक और गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। मीडिया की आवाज़ दबाने का ऐसा कुत्सित प्रयास हाल के वर्षों में किसी भी अन्य सरकार ने नहीं किया है।
5. बॉलीवुड को अपनी बपौती समझने वाले इन लोगों ने केवल वैचारिक असहमति के कारण गैरकानूनी रूप से अभिनेत्री कंगना रनौत का घर भी ढहा दिया।
6. देश के अनेक हिस्सों में "सर तन से जुदा" जैसे खौफनाक नारे लगाने वाले उग्र प्रदर्शनों से इन्हें समस्या नहीं होती, लेकिन महज हनुमान चालीसा पाठ का एलान करने के कारण निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति को जेल में डाल दिया।
उद्धव सरकार राज्य में नागरिकों की अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता के लिए भारी खतरा बन गयी थी। सरकार के मंत्री से लेकर सत्तारूढ़ दलों के सांसद-विधायक तक असहमत लोगों के लिए खुलेआम धमकी भरी भाषा का प्रयोग करते थे और उन्हें लाज तक न आती थी।
आशा करता हूँ कि राज्य में बनने जा रही नई सरकार नागरिकों को अघाड़ी सरकार द्वारा स्थापित भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाएगी और लोकतंत्र के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने के लिए काम करेगी।

Related Posts

Follow Us