मोहम्मद ज़ुबैर और लेफ्ट इकोसिस्टम का 'Omerta code'

मोहम्मद ज़ुबैर और लेफ्ट इकोसिस्टम का 'Omerta code'

आतंकी बुरहान वानी तो याद ही होगा ? एक गरीब हेडमास्टर का बेटा बताकर कैसे इस खूंखार आतंकवादी को Humanise करने की कोशिश की गई.

आपने एक बात गौर की होगी..भारत में अगर पाताल (अति दूरस्थ या दुर्गम इलाके) में भी रहने वाले किसी मुसलमान को कोई थप्पड़ मार दे तो लेफ्ट इकोसिस्टम से सम्बद्ध मीडिया तुरंत वहां पहुंच जाता है..'पीड़ित' के परिवार वालों की बाइट...उसके रिश्तेदारों के बयानों को एम्पलीफाई करके ये साबित करने में पूरी ताकत झोंक दी जाती है कि मोदी सरकार कितनी बड़ी फासिस्ट है..तानाशाह है..

आतंकी बुरहान वानी तो याद ही होगा ? एक गरीब हेडमास्टर का बेटा बताकर कैसे इस खूंखार आतंकवादी को Humanise करने की कोशिश की गई..दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस वालों पर बंदूक तानने वाला शाहरुख तो याद ही होगा ? किस तरह उसे जिम जाने वाला और म्यूजिक पसंद करने वाला एक पारिवारिक लड़के के तौर पर पेश किया गया..

लेकिन फॉल्ट न्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को गिरफ्तार हुए इतने दिन हो चुके हैं..लेकिन आज तक उसके परिवार का एक भी बयान सामने नहीं आया..अगर आप एक LayMan (जो जुबैर की हकीकत नहीं जानता है) की तरह जुबैर का केस देखेंगे तो आपको लगेगा कि उसके साथ जुल्म हो रहा है..ज्यादती हो रही है..यानी ये एक आइडियल केस है जिसमें परिवार वाले मोदी सरकार पर ये आरोप लगा सकते हैं कि जुबैर को टॉर्चर किया जा रहा है..सरकार उससे बदला ले रही है..लेकिन परिवार वाले अभी तक सामने नहीं आए हैं...ना मां, ना बाप, ना बीवी, ना बच्चे...सामने आना तो छोड़िए लेफ्ट इकोसिस्टम के मीडिया ने जुबैर को लेकर कोई Human Story भी नहीं बनाई..उसे एक सीधा-साधा फैमिली मैन साबित करने की कोशिश नहीं की..क्या आपको ये सब कुछ हैरान नहीं कर रहा ? क्या आपको ये कुछ अजीब नहीं लग रहा कि लेफ्ट विंग मीडिया ने जुबैर की फैमिली के मामले में इतनी सीक्रेसी क्यों मेन्टेन कर रखी है जबकि वो आतंकवादियों को भी हीरो की तरह प्रोजेक्ट करने की कोशिश करता है...तो इसका जवाब एक शब्द में छिपा है..और वो शब्द है "Omerta" इस शब्द को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में कुछ इस तरह डिफाइन किया गया है..

Omerta : Among the Mafia a code of silence about criminal activity and a refusal to give evidence to the Police.

"Omerta" यानी माफिया वर्ल्ड का एक ऐसा अलिखित कानून..एक ऐसा अलिखित संविधान जिसका पालन हर माफिया करता है..माफिया ना तो एक-दूसरे के बारे में और ना ही एक दूसरे के परिवार के बारे में कानूनी एजेंसियों को सूचना देते हैं..बस ये समझ लीजिए कि भारत में लेफ्ट इकोसिस्टम भी एक माफिया वर्ल्ड है..पारम्परिक माफिया और लेफ्ट इकोसिस्टम के माफिया में बस यही अंतर है कि पारम्परिक माफिया अपराध करता है और लेफ्ट इकोसिस्टम के माफिया एंटी हिंदू काम करते हैं...एंटी हिंदू एजेंडा और नैरेटिव चलाते हैं और इससे पैसे कमाते हैं...

क्या आपको ये पता है कि मोहम्मद जुबैर की 2012 से पहली की हिस्ट्री किसी को नहीं पता है..कहां रहता था..क्या काम करता था..कहां काम करता था..घर कहां है..परिवार कहां है..पिछले 5 साल से जुबैर इतना चर्चित रहा है..क्या आपको इनमें से किसी भी सवाल का जवाब मालूम है कि जुबैर कौन है ? मुझे भी बस इतना पता है कि जुबैर का घर बैंगलुरू के उसी डीजे हल्ली इलाके में है..जहां 2 साल पहले यानी 2020 में एक फेसबुक पोस्ट को लेकर मुसलमानों ने दंगे किए थे..और जुबैर का कितना जलवा है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस जब जुबैर को लेकर उसके डीजे हल्ली वाले घर में लेकर गई और एक न्यूज़ चैनल ने उस खबर का वीडियो यूट्यूब पर डाला तो यूट्यूब ने उस वीडियो को ही डिलीट कर दिया..ऐसा जलवा है जुबैर का..

और इसी जलवे में जुबैर का राज़ छिपा है..कुछ साल पहले तक Unoffical Susu Swamy नाम से सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले मोहम्मद जुबैर नाम का शख्स आता है..Alt News की स्थापना करता है और अचानक से लेफ्ट इकोसिस्टम का हीरो बन जाता है..एंटी मोदी कैम्प का Rallying Point बन जाता है..आतंकवादियों का बचाव करता है..एंटी हिंदू नैरेटिव चलाता है..Riot Apologist बनता है..उसके द्वारा वायरल की गई एक आधी-अधूरी क्लिप

से देश में दंगे हो जाते हैं..कई लोगों की जान चली जाती है...फिर भी लेफ्ट इकोसिस्टम उसे सिर आंखों पर बिठाए रहते हैं..इतना सब कुछ करने के बावजूद वो लगातार प्रमोट होता रहता है..और नौबत यहां तक पहुंच जाती है कि UN से लेकर जर्मनी तक उसकी गिरफ्तारी पर विरोध दर्ज कराते हैं..

क्या आपको ये सब बातें हैरान नहीं करती ? बस इसी हैरानी में जुबैर का सारा राज़ छिपा है..सच तो ये है कि जुबैर को एक बहुत बड़े प्लान के तहत प्लांट किया गया है..और उसे प्लांट करने में गल्फ कंट्रीज ही नहीं बल्कि कुछ वेस्टर्न ऑर्गनाइजेशन का भी हाथ है..यही वजह है कि उसे इतने जबरदस्त तरीके से प्रमोट किया जाता है..प्रतीक सिन्हा और उनकी मां निर्झरा सिन्हा भी ऑल्ट न्यूज़ के डायरेक्टर हैं लेकिन सारी लाइम लाइट जुबैर पर रहती है..ये सब कुछ ऐसे नहीं हुआ...जुबैर को लाइम लाइट में रखने के लिए बहुत पैसे और संसाधन खर्च किए जा रहे हैं क्योंकि उसके सहारे इंडिया की इमेज खराब करनी है..ये बात सरकार भी जानती है..इसीलिए उस पर अब शिकंजा कसा जा रहा है..आपको क्या लग रहा है कि जुबैर को सिर्फ एक ट्वीट के लिए अरेस्ट किया गया है ? जुबैर की गिरफ्तारी बहुत हिम्मत का काम था..क्योंकि वो शतरंज का प्यादां नहीं बल्कि ऐसा घोड़ा है जो ढाई चाल चलकर मार कर सकता है..

✍🏼 DEEPAK JOSHI

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