खाद्यान पर जीएसटी लगने से बर्बाद होगा 6 करोड़ का पैकिंग मैटेरियल, मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहा विपक्ष

देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी पर इन टैक्स का बोझ पड़ेगा, जो 25 किलो/लीटर से कम का सामान खरीदते है।

खाद्यान पर जीएसटी लगने से बर्बाद होगा 6 करोड़ का पैकिंग मैटेरियल, मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहा विपक्ष

18 जुलाई से देश मे सभी प्रीपैक्ड व प्री लेबल खाद्यान एवं अन्य वस्तुओं पर जो 25 किलो   /25लीटर या उससे कम की प्री पैकिंग में ब्रांडेड एवं नॉन ब्रांडेड पर 5% जीएसटी लागू हो गई है। इस मुद्दे पर व्यापारी संगठन कैट ने वित्तमंत्री को पत्र लिखकर 3 माह तक के लिए इस प्रणीली को स्थगित करने की मांग की है। 

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ ( कैट) ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को एक पत्र भेजकर आग्रह किया है की है की 18 जुलाई से बिना ब्रांड वाले खाद्यन एवं अन्य वस्तुओं का लगभग 30 हज़ार करोड़ रुपए का माल तथा लगभग 6 हज़ार करोड़ रुपए का पैकिंग मैटेरियल बाज़ार में स्टॉक के रूप में पड़ा है , इसको देखते हुए कम से कम 3 महीने तक नोटिफ़िकेशंन को लागू करना स्थगित किया जाए। कैट ने यह भी कहा है की बड़ी संख्या में बिना ब्रांड के उत्पाद के निर्माता एवं व्यापारियों को जीएसटी में पंजीकरण कराना है जिसमें समय लगेगा, इस दृष्टि से भी अधिसूचना को लागू करने को स्थगित करना ज़रूरी है । 

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की वर्तमान में पूरे देश के सभी निर्माताओं ,दुकानदारों , प्रोसेसर्स, वेंडर्स के पास करीब ₹ 6 हजार करोड़ का पैकिंग मैटेरियल पड़ा हुआ है क्योंकि आम तौर पर सामान्य व्यापार प्रक्रिया में लगभग 3 से 6 माह की खपत के अनुसार स्टॉक रखा जाता है। 

अब जीएसटी के दायरे में आने के बाद फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड एक्ट एवं लीगल मैट्रोलोजी एक्ट के अनुसार पैकिंग में भी नए सिरे से पैकिंग मैटीरियल बनवाना होगा, इससे जो माल बहुत बड़ी मात्रा में स्टॉक अथवा प्रोसेस लाइन में पड़ा है , वो अनुपयुक्त होने के कारण इस्तेमाल में नहीं आ सकेगा एवं नई पैकिंग बनाने में कुछ समय भी लगेगा, इस बात को दृष्टि में रखते हुए हमारा आपसे आग्रह है की फिलहाल इस जीएसटी नियम के प्रावधान को लागू करने के लिए तीन महीने के लिए स्थगित किया जाए जिससे देश में पड़े हुए पैकिंग मटेरियल की बर्बादी भी न हो और तुरंत भारी मांग होने से नए पैकिंग मैटेरियल की किल्लत भी न हो।

मगरमच्छ के आंसू बहा रहा विपक्ष

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी नेताओं द्वारा 5% जीएसटी लगाने के विरोध को मगरमच्छ के आंसू बहाने वाला करार दिया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा जीएसटी का विरोध करने का यह कृत्य व्यापारियों के गुस्से से अपनी खाल बचाने के अलावा और कुछ नहीं है। जीएसटी की मूल भावना को विकृत करने के लिए राज्यों  के वित्त मंत्री पूरी तरह से जिम्मेदार हैं जिसके कारण से कर प्रणाली बेहद जटिल हो गई है। 

जीएसटी परिषद में विपक्ष ने क्यों नहीं किया विरोध

खंडेलवाल ने कहा कि पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, उड़ीसा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे 10 बड़े और महत्वपूर्ण राज्य हैं। इन राज्यों के वित्त मंत्रियों ने बिना ब्रांड के खाद्यान्नों पर जीएसटी लगाने पर कभी भी जीएसटी परिषद में विरोध का एक शब्द भी नहीं बोला। 

सभी राज्य के वित्त मंत्री बड़े पाखंडी हैं और केवल राजनीतिक लाभ चाहते हैं ऐसा लगता है। जब निर्णय पारित किया जा रहा था तो 28-29 जून को चंडीगढ़ में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा के लिए विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के एक भी वित्त मंत्री ने इस तरह के प्रस्ताव का कड़ा विरोध क्यों नहीं किया। वे चाहते थे कि इसे अधिसूचित किया जाए ताकि वे बाद में केंद्र सरकार पर हमला कर सकें।

भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा कि इसके लिए अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी जिम्मेदार हैं। वे देश की लगभग 85% आबादी द्वारा प्रतिदिन उपभोग किए जाने वाले गैर-ब्रांडेड खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने के इस तरह के निर्णय को पारित करने के अपने दायित्व से बच नहीं सकते हैं।

 

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