पत्रकार (पक्षकार-क्योंकि अब सभी पक्षकार हैं) अविनाश दास की गिरफ्तारी पर एक टीप

पत्रकार (पक्षकार-क्योंकि अब सभी पक्षकार हैं) अविनाश दास की गिरफ्तारी पर एक टीप

खुशफहमी कह लीजिए..ये गलतफहमी..ये भी गज़ब की चीज है..इंसान को खुद को खुदा होने का भ्रम होने लगता है..भले ही वो उस लायक हो ना हो..'पत्रकार' अविनाश दास को भी अपने खुदा होने की खुशफहमी थी लेकिन आज उनकी गिरफ्तारी के बावजूद सोशल मीडिया पर जिस तरह का सन्नाटा है..उससे साफ है कि उनकी हैसियत क्या थी ? मैं भी सिर्फ इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि अविनाश दास उस बीमारी के एक लक्षण हैं..जो सोशल मीडिया यूज करने वालों को लगती जा रही है..इसके अलावा एक ज़माने में कुछ महीनों तक मैंने उनका ब्लॉग "मोहल्ला" भी पढ़ा था तो सोचा थोड़ा उनपर लिख दिया जाए..

आजकल के पत्रकारों में एक ये बीमारी लग गई है कि विरोध के नाम पर तथ्यों को भी तोड़-मरोड़ दो..मिसलीडिंग फोटो और गुमराह करने वाली खबरें शेयर कर दो..अविनाश दास ने भी वही किया..झारखंड में IAS अफसर पूजा सिंघल जब करोड़ों के कैश के साथ गिरफ्तार हुई तो अविनाश दास ने अमित शाह के साथ पूजा सिंघल की एक फोटो ट्वीटर पर शेयर की..और साथ में कैप्शन लिखा..

"घर में करोड़ों का कैश पकड़ाने से थोड़े दिन पहले की पूजा सिंघल की तस्वीर"

अब यहां पर 2 गड़बड़ियां थीं..पहली तो ये कि अमित शाह और पूजा सिंघल की ये फोटो थोड़े दिन पहले की नहीं बल्कि 2017 की थी..यानी 5 साल पुरानी...अब 5 साल पुरानी फोटो को थोड़े दिन पहले की बताया जाए तो एक बेईमानी तो आपने वहीं कर दी..दूसरी बेईमानी अविनाश दास ने ये की थी कि उन्होंने पूजा सिंघल के घर से करोड़ों के कैश बरामद होने को अमित शाह के साथ उनकी करीबियों से जोड़ा..वो ये कहना चाह रहे थे कि अमित शाह से नजदीकियों की वजह से ही पूजा सिंघल को भ्रष्टाचार करने का लाइसेंस मिला...जबकि हकीकत ये थी कि पूजा सिंघल ने खनन सचिव रहते हुए पत्थर की क्वारी यानी स्टोन माइन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम अलॉट की थी..कहीं आपने सुना कि मुख्यमंत्री रहते हुए किसी नेता ने खुद को इस तरह फेवर किया हो..अविनाश दास ने तीसरी बेईमानी ये कि थी कि पूजा सिंघल और अमित शाह की 5 साल पुरानी फोटो किसी निजी मुलाकात की नहीं बल्कि किसी सार्वजनिक रैली की थी..अब ये बात तो आप जानते हैं कि IAS अफसरों के कई कामों में से एक काम नेताओं को..मंत्रियों को ब्रीफ करना भी होता है..वही पूजा सिंघल कर रही थी..लेकिन अविनाश दास ने इसे किसी और ही बात से जोड़ दिया..

कोढ़ में खाज ये कि जब ये सारी बातें अविनाश दास को बताईं गई तो ना तो उन्होंने ट्वीट डिलीट किया..ना ही गलती मानी..मतलब चोरी भी करेंगे और सीनाज़ोरी भी..अब आप कहेंगे कि ऐसी बेईमानी करने वाले अविनाश दास अकेले तो नहीं हैं..सही बात है..दूसरे लोग भी करते हैं..लेकिन अगर इस तर्क को सही मान लिया जाए तो फिर ये भी कहा जाने लगेगा कि मर्डर के किसी मामले में A को इसलिए गिरफ्तार नहीं करना चाहिए क्योंकि इसी तरह के मामले में B को गिरफ्तार नहीं किया गया था..जितना लिखना है..लिखो..जिस नेता का जितना विरोध करना है करो..लेकिन तथ्यों से छेड़छाड़ मत करो..यही वजह है कि पिछले दिनों एक न्यूज़ चैनल ने राहुल गांधी के मामले में जो किया था...उसे लेकर मैं चैनल और जानबूझकर गलती करने वाले लोगों के खिलाफ एक्शन लेने का पक्षधर था..

नोट-सोशल मीडिया के इतना प्रसार हो चुका है फिर भी वेरिफाइड अकाउंट होने और थोड़ा मशहूर होने के बावजूद ये पत्रकार खुलेआम फेक न्यूज़ फैलाते हैं..सोचिए सोशल मीडिया से पहले इन लोगों ने कितना कुकर्म किया होगा? कितना एजेंडा चलाया होगा?

✍🏼 DEEPAK JOSHI

 

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