किशोर कुमार: वह युवा स्वर जो हमेशा हवाओं में गूंजता रहेगा

किशोर कुमार: वह युवा स्वर जो हमेशा हवाओं में गूंजता रहेगा

युवता और पौरुष, उल्लास और उदासी, शरारत और संजीदगी जिस एक कंठस्वर में साथ साथ मिलते हैं वह किशोर कुमार का है। बर्मन दादा का शुक्रिया अदा करना चाहिए। नेपथ्य के इस स्वर को वे आगे लाए। और वह ऐसा आगे आया कि फिर कभी पीछे नहीं गया।

अब राजेश खन्ना, बर्मन दादा, पंचम, किशोर कुमार कोई नहीं हैं, मगर ' मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू' से लगा कर ' हमें तुमसे प्यार कितना ' तक वह एक आवाज़ कायम रहेगी जो चिरयुवा रूमान की आवाज़ है। लक्ष्मी प्यारे के प्रिय गायक रफ़ी थे, मगर क्या गीत बनाया है उन्होंने भी किशोर के लिए : मेरे महबूब कयामत होगी ...' और जब किशोर नए जमाने के नायकों की आवाज़ बने तब तो शायद ही कोई संगीतकार हो जिसने उनसे न गवाया हो। पता नहीं , रोशन ने किशोर से कितने गीत गवाए लेकिन राजेश रोशन ने तो 'जूली' के उन्हीं गीतों से शुरुआत की जो आज भी किशोर लता के युवा स्वर संजोए हुए हैं। 'भूल गया सब कुछ' और 'दिल क्या करे। 'कलाकारों को जाना होता है लेकिन कला को जरा मरण से मुक्ति का वरदान मिला हुआ है। वह युवा, पुरुष स्वर हवाओं में हमेशा गूंजता रहेगा जो गाता था :

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हवाओं पे लिख दो 

हवाओं के नाम

 

लेख: आशुतोष दुबे

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