बिहार की राजनीति से आउटडेटेड हो चुके नितीश कब तक कायम रख पायेंगे जलवा

बिहार की राजनीति से आउटडेटेड हो चुके नितीश कब तक कायम रख पायेंगे जलवा

आज के एलईडी लाइट के जमाने में जैसे लालटेन बीते दिनों की बात हो चुकी है, वैसे ही बिहार में भाजपा के लिए नितीश कुमार भी आउटडेटेड हो चुके है। खुद ही गठबंधन छोडने का फैसला कर नितीश ने भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा की है या खुद भाजपा के चक्रव्युह में फंस चुके है! पढ़े वरिष्ठ पत्रकार दीपक जोशी का लेख

नीतीश कुमार की पलटी मारने से बीजेपी निराश क्यों नहीं है ?

क्योंकि बीजेपी खुद नीतीश कुमार से पल्ला छुड़ाना चाहती थी...बस फर्क इतना है कि बीजेपी का प्लान नीतीश कुमार को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निपटाना था..लेकिन नीतीश कुमार करीब 3 साल पहले ही बीजेपी से अलग हो गए..इससे बीजेपी को ये फायदा होगा कि उसे 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा..अगर आपको लग रहा है कि नीतीश कुमार ने बीजेपी को झटका दिया है तो

निम्नलिखित बातों पर गौर करिए..

1- नीतीश कुमार का कद छोटा करने की कवायद (Cut To Size) बीजेपी ने 2020 के विधानसभा चुनाव से ही शुरू कर दी थी..अगर आपको लग रहा है कि नीतीश कुमार से चिराग पासवान की बगावत के पीछे सिर्फ चिराग का दिमाग था तो आप बहुत भोले हैं...चिराग को बीजेपी ने समझा दिया था कि तुम्हारे पास अभी काफी उम्र है..तुम्हें पद मिलते रहेंगे..अभी जैसा हम कह रहे हैं..वैसा करो...चिराग पासवान भी बीजेपी की बताई राह पर चले और नीतीश कुमार की जेडीयू 71 सीट से सीधे 43 सीट पर आ गई..जेडीयू के ललन सिंह ने इसी को चिराग मॉडल कहा है..हालांकि उन्होंने बीजेपी का नाम नहीं लिया..

2- बिहार में नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री थे लेकिन बीजेपी ने उन्होंने पूरा टाइट कर रखा था..2 डिप्टी सीएम..विधानसभा स्पीकर और ज्यादातर मंत्री पद बीजेपी के ही पास हैं..इतना सब होने के बावजूद बीजेपी लगातार कुछ ना कुछ ऐसा करती रही..जिससे नीतीश कुमार असहज हों..फिर चाहे विधानसभा स्पीकर के साथ नीतीश का टकराव हो या फिर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल का अपने फेसबुक पोस्ट्स के ज़रिए लगातार नीतीश सरकार की आलोचना करना..

3- ताबूत में आखिर कील RCP सिंह साबित हुए..जिन रामचंद्र प्रसाद सिन्हा को नीतीश कुमार ने जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया..राज्यसभा MP बनाया..उन्हीं RCP सिंह को बीजेपी ने अपना एजेंट बना लिया..
तो आपको क्या लगता है कि बीजेपी को ये पता नहीं होगा कि नीतीश कुमार इन सब बातों से नाराज़ हो सकते हैं...पलटी मारकर फिर लालू यादव के साथ जा सकते हैं..ये सब जानते हुए भी बीजेपी ने आखिर नीतीश कुमार को परेशान करना क्यों जारी रखा ? बीजेपी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो चाहती थी कि नीतीश खुद NDA से नाता तोड़ें ताकि तलाक की तोहमत उसके सिर ना आए..

अब सवाल ये है कि बीजेपी...नीतीश कुमार से पल्ला क्यों झाड़ना चाहती थी ? उसने इतना बड़ा रिस्क क्यों लिया ? तो इसका जवाब ये है कि बीजेपी ने अब ये नीतिगत फैसला कर लिया है कि अब वो हर राज्य में खुद को मजबूत करेगी..छोटा भाई बनना तो बीजेपी ने पहले ही छोड़ दिया था..अब वो बड़ा भाई भी नहीं बनना चाहती..ये नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बीजेपी है..मोदी और शाह की रणनीति है कि अब मुकाबला बीजेपी Vs ऑल होगा..यानी एक पार्टी बीजेपी होगी..दूसरी तरफ चाहे TMC हो..DMK हो...AAP हो... BJD हो..SP हो, NCP हो या फिर TRS हो..बीजेपी अब सीधे फाइट करेगी..इसका फायदा बीजेपी को मिल भी रहा है..कई राज्यों में सरकार है और कई राज्यों में मुख्य विपक्षी दल..

आपको याद होगा कुछ ही दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान दिया था कि अगर बीजेपी अपनी विचारधारा पर कायम रहती है तो कुछ साल या दशक बाद क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी..बीजेपी इसी रणनीति पर काम कर रही है...हर रीजनल पार्टी पर एक परिवार का कब्जा है और ये अकाट्य तथ्य है कि सियासी संघर्ष में हर नई पीढ़ी..पिछली पीढ़ी से कमज़ोर होती है...अखिलेश यादव..मुलायम की तरह ज़मीन पर नहीं उतरते...लालू यादव का मुकाबला तेजस्वी यादव नही कर पाएंगे...एम करुणानिधि की तरह का कमाल एमके स्टालिन नहीं दिखा पाएंगे..साफ है बीजेपी को वैसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा..जैसा मुलायम, लालू या करुणानिधि के रहते करना पड़ता..

अब सवाल ये है कि बिहार में बीजेपी का क्या होगा..क्या यूपी की तरह बिहार में भी बीजेपी कमाल कर पाएगी..तो इसका जवाब ये है कि बिहार फिलहाल बीजेपी के लिए उतना आसान नहीं रहेगा..इसकी 2 वजहें हैं

1- बिहार में बीजेपी के पास कोई नेता नहीं है जो मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो सके...बिहार में कोई योगी आदित्यनाथ नहीं है

2- बिहार अब तक उस तरह हिंदुत्व की चपेट में नहीं आया है..जैसा यूपी में है...चुनावी राजनीति में बिहार में अब भी धर्म पर जाति भारी पड़ती है..यूपी में तो हिंदुत्व के दम पर बीजेपी ने अखिलेश को यादव-मुस्लिम तक समेट दिया है...कांग्रेस खत्म है और मायावती बुजुर्ग हो गई हैं...लेकिन बिहार में लालू यादव की वजह से आरजेडी अब भी पुख्ता है..इसके अलावा वामपंथी भी यहां मजबूत हैं और कांग्रेस भी..मुसलमान तो बीजेपी के साथ आने नहीं है..इसके अलावा यादवों को छोड़कर बाकी हिंदुओं को हिंदुत्व के छाते तले लाने में बीजेपी को अभी वक्त लगेगा..लेकिन राजनीति सब्र का भी खेल है..नीतीश कुमार तो अगली बार खत्म हैं..कोई राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं है तो कुर्मी वोट बीजेपी के पक्ष में आएंगे..वामपंथ भी ढलान पर है..कुल मिलाकर बिहार की सियासत भी बीजेपी बनाम तेजस्वी की तरफ बढ़ रही है..और बीजेपी यही चाहती है..

✍🏼 DEEPAK JOSHI

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