आजादी के रंग में रंगा शिवाला का प्रसिद्ध प्रयाग नारायण मंदिर

आजादी के रंग में रंगा शिवाला का प्रसिद्ध प्रयाग नारायण मंदिर

दक्षिण भारतीय शैली में बने इस मंदिर में प्रतिदिन आरती के समय ऊंट की खाल से बने हुए नगाड़ों को बजाया जाता है। वर्ष 1847 के स्वतंत्रता संग्राम में नाना राव पेशवा के सैनिकों द्वारा युद्ध की मुनादी के दौरान ये नगाड़े बजाए जाते थे। 


कानपुर के सबसे पुराने क्षेत्र शिवाला में स्थित प्रचीन प्रयाग नारायण मंदिर को आजादी के जश्न में आज तिरंगे में सजाया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर इस 165 साल पुराने मंदिर को 03 से 15 अगस्त तक तिरंगे से सजा कर रखा जायेगा। 

1857 की क्रांति का गवाह है यह मंदिर
दक्षिण भारतीय शैली में बने इस मंदिर में प्रतिदिन आरती के समय ऊंट की खाल से बने हुए नगाड़ों को बजाया जाता है। वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में नाना राव पेशवा के सैनिकों द्वारा युद्ध की मुनादी के दौरान ये नगाड़े बजाए जाते थे। 

मुख्य द्वार पर स्थित है गरुण की विशाल प्रतिमा
दक्षिण भारतीय कला शैली में बने इस मंदिर में भक्तवत्सल नारायण जी महाराज भगवान वेंकटेश भूदेवी नीला देवी सुदर्शन भगवान गरुड़ महाराज और श्री गोदारंगमन्नार महाराज विराजमान हैं। शिवालय स्थित इस विशालकाय मंदिर में मुख्य द्वार पर लगभग 56 फुट ऊंचा बनाया गया है। जहां पर भगवान लक्ष्मी नारायण के प्रिय गरुण की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है जो उत्तर भारत की विशालतम प्रतिमाओं से में से एक है। 

तमिल व संस्कृत में होती है दैनिक आरती
 मंदिर में प्रतिदिन दैनिक पूजा नारद आगम विधि द्वारा तमिल और संस्कृत भाषा में की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन मंगला आरती के समय एक गाय को भगवान के सम्मुख लाए जाने की प्रथा है इसी के बाद पुजारी पट खोल कर आरती करते हैं। भगवान को प्रथम बाल भोग मध्याह्न और रात्रि भोग अर्पित किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन प्रभु को अर्पित किए जाते हैं। मंदिर में प्रतिवर्ष एक से 30 दिनों के उत्सव की परंपरा है। जिसमें एक माह का धनुर्मास उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है। उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृति के सात्विक मेल का दर्शन करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं कानपुर के बैकुंठ मंदिर में पूरी होती हैं। 

Related Posts

Follow Us