जानें, सुप्रीम कोर्ट में क्यों हो रही है EWS आरक्षण पर बहस

जानें, सुप्रीम कोर्ट में क्यों हो रही है EWS आरक्षण पर बहस

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गयी हैं। जिनमें से प्रमुख रूप से नाम तमिलनाडु की सत्ता में बैठी पार्टी डीएमके का है। डीएमके का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का आधार EWS नहीं हो सकता है। आरक्षण केवल सामाजिक पिछड़ेपन को कम करने के लिए दिया जाता है। 

EWS क्या है :

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जनवरी 2019 में देश में EWS आरक्षण की अधिसूचना जारी हुई थी। सविंधान के 103वें संशोधन के आधार पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने ये अधिसूचना जारी की थी। जिसके तहत सामान्य वर्ग के STUDENTS को शिक्षण संश्थानों और नौकरी में 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत वो STUDENTS आतें हैं, जिनके पिता की आय लगभग 8 लाख से कम व उनकी खेती लगभग 5 एकड़ से कम होनी चाहिए। EWS का फुल फॉर्म ECONOMICAL WEAKER SECTIONS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ) है। 

सविंधान सभा में होगी किस प्रकार सुनवाई :

सविंधान सभा में पांच जजों में मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रविंद्र भट, जस्टिस दिनेश महेश्वरी,  जस्टिस एस बी पारदीवाला और जस्टिस बेला त्रिवेदी ने बीते हफ्ते ही तय किया था कि सविंधान संशोधन की वैधता है या नहीं। इसकी जांच के लिए इन्होने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर सविंधान का उल्लंघन, OBC, SC & ST वर्ग को EWS कोटे से अलग करके सविंधान की मूल  संरचना का उल्लंघन करना, क्या EWS कोटा सविंधान के मूल ढांचे के खिलाफ है या नहीं इस प्रकार करेंगे। 

EWS में मोदी सरकार का क्या मत :

अभी मोदी सरकार का इस पर मत देना बाकी है। हालाँकि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अपना एफीडेविट दिया है जिसमें मंत्रालय ने कहा है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सविंधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग चाहें वो कोई वर्ग का हो, उनके हितों की रक्षा होगी। 

 

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