खतरे में पड़ सकता है चीन का जर्मनी के साथ कारोबार

खतरे में पड़ सकता है चीन का जर्मनी के साथ कारोबार

जर्मनी के आर्थिक मामलों के मंत्री का कहना है कि अब जर्मनी चीन से आने वाला कच्चा माल, सेमीकंडक्टर और बैटरी को लेने में साझेदारी को कम कर देगी। क्योंकि वह अब चीन के साथ आयात और निर्यात सम्बन्ध को कम करना चाहतें हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि जर्मनी के किसी मंत्री ने खुलकर ऐसा बोला हो।  

आयात और निर्यात की गारंटी : 

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हाबेक का कहना है क़ि जर्मनी को अचानक किसी भी देश के साथ आयात और निर्यात को बंद करने की घोषणा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने पर उसके देश के साथ सम्बन्ध में गिरावट आ जाएगी। यदि जर्मनी ऐसा करेगा तो अपने देश में बने हुए माल को वो कहाँ पर निर्यात करेगा। यदि रूस और यूक्रेन के बीच युध्य में चीन ने यूक्रेन का साथ नहीं दिया है तो रूस के समर्थन में भी नहीं रहा है। इसप्रकार हम किसी भी देश से इतनी जल्द सम्बन्ध को ख़राब नहीं कर सकते हैं। 

सिल्क रोड पर क्या कहा यूरोप ने :

हाबेक ने जर्मनी को यूरोप में सिल्क रोड को बनाने में समर्थन देने को मना किया है। यदि जर्मनी और यूरोप के सभी देश चीन के सिल्क रोड बनने के लिए मना कर देते हैं। तो चीन जर्मनी और यूरोप के ढांचे को जानने में असफल रहेगा। हाबेक का कहना है कि चीन की कास्को कंपनी, जर्मनी के हाफेन हैम्बर्ग के कंटेनर ऑप्रेशन में हिस्सेदारी चाहती है। चीन प्लास्टिक से लेकर हर वस्तु को अपने कारोबार में मिलाकर साझेदारी को बढ़ाना चाहता है। इसलिए हाबेक का कहना है कि मैं  चीन के यूरोप में आने के समर्थन में नहीं हूँ। क्योंकि चीन ने भी राजनीति करते हुए रूस का समर्थन नही किया है। जिससे रूस और चीन के बीच में ब्यापार अच्छे से रहा है। 

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