भूटान ने भारतीय पर्यटकों के साथ ऐसा क्या किया, जिससे भारतीय पर्यटक हुए परेशान

भूटान ने भारतीय पर्यटकों  के साथ ऐसा क्या किया, जिससे भारतीय पर्यटक हुए परेशान

भारत के पर्यटकों को अपने कुछ पड़ोसी मुल्कों में जाने के लिए धन नहीं देना पड़ता था और न ही पडोसी पर्यटकों को आने में देना पड़ता था। लेकिन कोरोना काल के दौर से कोई भी भारतीय पर्यटक भूटान की यात्रा पर नहीं गया है।  भूटान कोरोना काल से ही अपने यहाँ पर्टयकों को आने में रोक लगाए हुए है। परंतु धीरे - धीरे कोरोना को कम होते देखकर 23 सितम्बर से भूटान ने पर्यटकों को आने अनुमति दे दी है। लेकिन उसके बदले सभी देशों के पर्यटकों से मोटी रकम चुकता करने की शर्त लगा दी है। 

भूटान ने पर्यटन स्थलों को प्राकृतिक सौंदर्य और संशाधनों से भरपूर कर दिया है। भूटान पर्यावरण को लेकर हमेशा से  सतर्क रहा है। भूटान ने अपनी पर्यटन नीति, बुनियादी ढाँचे, सेवाएं, पर्यटकों के अनुभवों और पर्यावरण पर ज्यादा ध्यान दिया है। भूटान के विदेश मंत्री भी पर्यटकों को अच्छा अनुभव देकर, अपने नागरिकों को रोजकार देना चाहते हैं। पर्यटकों के लिए भूटान ने कई अच्छे - अच्छे होटलों को खुलवाया है, जिससे यहाँ आने वाले पर्यटकों को किसी भी चीज की असुविधा उत्पन्न न हो। 

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भूटान अपने देश में आये हुए पर्यटकों से कमाए हुए रुपयों को, अपने देश के पर्यावरण सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए उपयोग में लाना चाहता है।  भूटान अपने सांस्कृतिक पर्यावरण और पर्यटक स्थल को सुरक्षा प्रदान करने के बारे में अक्सर नयी - नयी नीतियों के साथ सोचता रहता है। भूटान मात्र केवल एक ऐसा देश है जिसकी कार्बन उत्सर्जन से ज्यादा कार्बन अवशोषण है। यह देश हम सभी भारतियों और अन्य दक्षिण एशियाई देशों को अपने पर्यावरण को बचाने की प्रेरणा देता है। इसी कारणवश भूटान अपनी मिशाल को पूरी दुनिया में कायम किये हुए है। 

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