हत्या मामला : 10 साल बाद जब आरोपियों को अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास , तब तक हो चुकी थी एक आरोपी की मौत

हत्या मामला : 10 साल बाद जब आरोपियों को अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास , तब तक हो चुकी थी एक आरोपी की मौत

उरई(जालौन)। कहते हैं कि सत्य कभी छुपा नहीं रहता चाहे कितने भी दिन यह साल बीत जाए एक न एक दिन वह सामने आता ही है और न्याय मिलता है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन से सामने आया जहां पर 10 साल बाद महिला की हत्या मामले में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

क्या है पूरा मामला

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मामला उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन के जिला कोतवाली जालौन का है। घटना बीते 10 साल पुर जुलाई 2012 की है। जब जालौन कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सहाव में खेत में एक महिला का निर्वस्त्र हालत में शव पड़ा मिला था। गांव के चौकीदार की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। मृतका के मोबाइल फोन के सीडीआर के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया। 

तहकीकात के बाद पता चला कि एट थाना क्षेत्र के ग्राम खरुसा निवासी डा.श्यामाजी चतुर्वेदी, ग्राम बिरासनी थाना एट निवासी इंद्रपाल पुत्र प्रीतम सिंह एवं रामकरन पुत्र मनीराम के विरुद्ध को हत्या व सबूत नष्ट करने में हाथ है। तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। मृतिका अनुसूचित जाति की थी लिहाजा मुकदमे में अनुसूचित जाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम की धारा भी लगाई गई। मुकदमे का ट्रायल एससीएटी कोर्ट में चला। पुलिस ने तीनों आरोपियो के विरुद्ध मजबूत साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र दाखिल किया। 

जब न्याय मिला तब एक आरोपी की हो चुकी है मौत

करीब 10 साल मुकदमे का ट्रायल चला। इस बीच एक आरोपित इंद्रपाल उर्फ बबलू की मौत हो गई। सुनवाई पूरी होने के बाद मंगलवार को इस मामले में फैसला सुनाया गया। शासकीय अधिवक्ता हृदेश पांडेय ने बताया कि एससीएसटी कोर्ट के न्यायाधीश शिवकुमार ने डा. श्यामा जी चतुर्वेदी को हत्या व साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है रामकरन को साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

रिपोर्ट : दीपू द्विवेदी (ब्यूरो चीफ)

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