पंजाब HC ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अध्यापक के साथ कुछ ऐसा किया, जिससे अध्यापक हुए भयभीत

पंजाब HC ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अध्यापक के साथ कुछ ऐसा किया, जिससे अध्यापक हुए भयभीत

पंजाब HC ने पंजाब यूनिवर्सिटी से 58 अध्यापकों को निकाल दिया है। पंजाब और हरियाणा HC ने 2016 में दिए गए पांच साल अनुमति का स्टे आर्डर रद्द कर दिया है। जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने 19 सितम्बर को स्टे आर्डर रद्द कर दिया है। यूनिवर्सिटी की तरफ से दोबारा अनुमति  भी जस्टिस ने सभी 58 अध्यापकों को हटा दिया है।  

वर्ष 2014 में टीचर्स के एक ग्रुप ने हाई कोर्ट पर याचिका दर्ज की थी कि रिटायरमेंट 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष ( जैसे : सेंट्रल यूनिवर्सिटी और आईआईटी जैसे संस्थानों)  में किया जाता है। हालाँकि केंद्र सरकार ने अदालत को बताया की PU  सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं है, जिससे 16 अगस्त 2016 को एकल न्यायाधीश की पीठ ने याचिका ख़ारिज कर दी। 6 साल से लगभग 130 अध्यापक पढ़ा रहे थे, क्योंकि विश्वविद्यालय में अध्यापकों की कमी HC को समक्ष आ रही थी। अब HC के अनुसार सभी अध्यापक पर्याप्त रूप से हैं। इसलिए HC ने सभी अद्यापकों की रिटायरमेंट की उम्र को 65 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष कर दी है। 

 

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