दुनियां में जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकता है भोजन संकट

दुनियां में जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकता है भोजन संकट

दुनियां में बढ़ते तापमान के कारण कई प्रकार के कीट - पतंगे और मधुमक्खियां विलुप्त होते हुए दिख रहे हैं। दुनिया में उभरती अर्थब्यवस्था में सभी देश अपने आप को अग्रसर बनाने के लिए, प्रकति की परवाह किये बिना कई प्रकार के कारखाने और उद्योग को स्थापित कर रहे हैं। जिससे प्रकति में ओजोन परत का क्षरण हो रहा है। नियमित ओजोन परत के क्षरण से तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे कई प्रकार के कीट - पतंगे विलुप्त की अवस्था में पहुँच गए हैं। 

सभी प्रकार के कीट - पतंगे ( जैसे : मधुमक्खियां, चमगादड़, झींगुर, तितलियाँ और कई प्रकार के कीट ) बसंत ऋतु में फूलों के पराग को लेकर फूलों को परागित करने में अहम् भूमिका निभाते हैं। लेकिन बढ़ते तापमान की वजह से न तो पराग उत्पन्न होते हैं, न ही परागकण निषेचित होते हैं, न ही फूल बन पाते हैं। जिससे मधुमख्यियां अपना भोजन ( फूल से प्राप्त रस ) प्राप्त नहीं कर पाती हैं, जिससे वह धीरे - धीरे विलुप्त अवस्था में जाती दिख रही हैं। 

बढ़ती टेक्नोलॉजी से सुपरमार्केट का निर्माण हो गया है, जिसमे फल और सब्जियां बनाने के लिए पौधों में मधु और पराग से भरे फूल तैयार किये जाते है। इसलिए मधुमक्खियां और कीट पतंगे दिन प्रतिदिन विलुप्त अवस्था में जाते दिख रहे हैं। फिलहाल, बीजों को फ़ैलाने के लिए प्रमुख जीव अपनी आबादी बढ़ाने लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह भोजन है। अगर पौधे पर्याप्त मधु और पराग नहीं बनाएंगे, तो उन्हें भोजन नहीं मिलेगा और आबादी संतुलित रूप से नहीं चल पायेगी।इसलिए, इसका एक ही समाधान है कि जीवाश्म ईधनों के इस्तेमाल में कटौती करना, उर्वरकों का कम इस्तेमाल करना और अधिक से अधिक वृक्षारोपड़ करना। इससे तेजी से बढ़ती गर्मी से निजात मिल जाएगी और फसलों के साथ - साथ मधुमक्खियों को भी राहत  मिल पायेगी।  

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