जीवों के जीवन में बुढ़ापा क्यों आता है

जीवों  के जीवन में बुढ़ापा क्यों आता है

जैसे - जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे - वैसे बुढ़ापा आता जाता है। जीवों के शरीर में ऐसा क्या होता है, जो चला जाता है और हमें दिखायी भी नहीं देता है और बुढ़ापा आ जाता है।  ऐसी कौन सी शक्ति होती है, जो समय बढ़ते वक्त कम होती जाती है। आओ इन सब के बारे में अध्यययन करते हैं। 

जब जीव की उम्र धीरे - धीरे बढ़ती है तो जीव जवान के साथ - साथ बुढ़ापा की ओर अग्रसर होने लगता है। शरीर की कई प्रकार की हड्डिया कमजोर होने लगती हैं। जीवों की आंखे कमजोर पड़ने लगती हैं, जोड़ हिलने लगते हैं और त्वचा पतली होने लगती है। जितना बूढ़े होते जाते हैं उतना ही बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। हड्डिया चरमरा जाती हैं और अंत में जीव  मर जाता हैं। अधिकांश जीवों में प्रजनन संबंधी कामयाबी, जो जीवनकाल में एक व्यक्ति की संतान पैदा करने की क्षमता के बारे में बताती है, वो भी उम्र के साथ घटने लगती है। प्रकृति में जो जीव जितना ज्यादा प्रजनन कर सशक्त संतान पैदा करने की क्षमता रखता है, वह उतना ही ज्यादा सशक्त होगा। क्योंकि उसके जीन्स ही उसके संतान पर होंगे। इसका मतलब यह है कि प्रजनन के बाद जो कुछ भी होता है। उसका इस बात पर बहुत ही कम असर पड़ता है कि आप अगली पीढ़ी को अपनी जीन्स कितनी कुशलता से दे पाते हैं। यही बात क्रमिक विकास को समझने की कुंजी है। इसलिए जीवों में उम्र के साथ प्राकृतिक चयन कमजोर पड़ता जाता है। 

मानव जीवों में सर्वोत्तम जीव माना गया है क्योंकि मनुष्य ही अपने तार्किक विचार सोंच और प्रस्तुत कर सकता है। मनुष्य जब सयोंग से गलत करता है या फिर उसके साथ गलत होता है। तो उसके पास वो जीन्स आ जाते हैं, जो उसके शरीर को विशुद्ध कर देंते ( जैसे : हिरोशिमा और नागाशाकी में अमेरिका के द्वारा गिराया गया। बम से आज भी यहाँ के लोग लूले, काने, बहरे आदि विशुद्ध तरीके से पैदा होते हैं ) हैं। मनुष्य को विशुद्ध संयोग की बदौलत आपको वंशानुक्रम यानी विरासत में एक खतरनाक म्यूटेशन मिल जाता है यानी खतरनाक  बदलाव आप में आ जाता है। हालांकि आप उन बुरे प्रभावों का अनुभव करने के लिए उतना लंबा नहीं जी पाएंगे, लेकिन वो म्यूटेशन आपके जिनोम (जीन्स ) में पड़ा रहेगा और जीन्स के माध्यम से आपकी संतान तक पहुंच जाएगा। इस प्रकार जल्द बुढ़ापा आता है। 

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