रूस से पलायन कर मंगोलिया जा रहे लोग

रूस से पलायन कर मंगोलिया जा रहे लोग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए रूस के आम नागरिकों को सेना में शामिल करने की घोषणा की थी जिससे रूस के लोग में चिंता की लहर दौड़ गई और रूस के लोंगो द्वारा पलायन शुरू हो गया। रूस के पलायन लोगो के द्वारा पलायन का कारण युद्ध में लोगों को न मरना है। 


रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए रूस के आम नागरिकों को सेना में शामिल करने की घोषणा कर दी थी। जिनकी घोषणा से पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई और लोगों द्वारा पलायन शुरू हो गया। हजारों लोग अभी तक रूस को छोड़ कर जा चुके हैं। लोगों द्वारा रूस-जॉर्जिया की सीमा को पार कर मंगोलिया देश में शरण लेना रूस के राष्ट्रपति द्वारा चिंता का कारण बन गया है। हाल ही के दिनों में मंगोलिया की तरह फिनलैंड, नॉर्वे, तुर्किए और जॉर्जिया में भी रूस से आने वालों वालो शरणार्थियों की संख्या बढ़ गई है। शरणार्थियों द्वारा देश, घर, परिवार और संस्कृति को पीछे छोड़ कर चले आना बहुत मुश्किल था, लेकिन यह शरणार्थियों को लोगों को मारने से बेहतर लगता है।

शरणार्थियों द्वारा मंगोलिया देश इसलिए चुना गया क्योंकि शरणार्थियों को लगा कि वहां पहुंचना आसान होगा। शरणार्थियों ने कहा, मैंने अपने कागजात और अपने बैग उठाए और भाग लिया। शरणार्थियों ने बताया कि हम लोंगो को सेना में भर्ती से बचाने के  लिए ऑनलाइन समूहों का एक बड़ा नेटवर्क है। जिसने हम लोंगो की मदद की है। देश के अंदर उपस्थित आम नागरिकों द्वारा इस बात का भय है कि रूस सीमाओं को बंद न कर दे, जिसकी वजह से लोगों ने भागने की प्रक्रिया और तेज कर दी है। हालांकि क्रेमलिन ने सोमवार 26 सितंबर को बताया है कि अभी सीमाओं को बंद करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। पुतिन की घोषणा के बाद से 3,000 से भी ज्यादा मंगोलिया में शरणार्थी प्रवेश कर चुके हैं, जिनमे में से अधिकांश पुरुष हैं। 

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