आज देश में चालू होने जा रही है, तीसरी वन्दे भारत की ट्रेन

आज देश में चालू होने जा रही है, तीसरी वन्दे भारत की ट्रेन

भारत में अग्रेजो के ज़माने से ट्रेन की यात्रा का प्रचलन है। भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चलाई गयी थी। यह ट्रेन केवल 34 किलोमीटर चली थी, और 400 लोगों को लेकर ब्रॉड गैज ट्रैक पर चली थी। वर्ष 1853 से लेकर आज तक कई ट्रेनों का आविष्कार हुआ और वो यात्रा में सुगमता  करने में सफल कर रही हैं। 

वर्ष 1853 के बाद से आज तक समय को देखते हुए कई प्रकार की सुपरफास्ट ट्रेनों  को बनाया गया है। भारत वर्ष 2014 के पहले तक कभी भी रेल विभाग में घाटे में नहीं रहा है। सरकार के राजस्व विभाग में रेल विभाग बहुत बड़ी हिस्सेदारी रखता है। इस महंगाई और बढ़ती अर्थव्यवस्था में समय की कमी को पूरा करने लिए रेल विभाग ने सुपरफास्ट ट्रेनों जिसे (शताब्दी एक्सप्रेस, पुष्पक, वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस) का अविष्कार किया है। इनमे से भारत में तीसरी वंदे भारत की ट्रेन (जो गांधीनगर से  मुंबई सेंट्रल) तक प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा हरी झंडी दिखाकर आज चलाई जाएगी। इस अवसर पर पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, रेलवे मंत्री अश्वनी वैष्णव और रेलवे राज्यमंत्री दर्शना जरदोष उपस्थित रहेंगे। 


यह तीसरी वंदे भारत भारत की पहली वाली ट्रेनों से अलग होगी। इस ट्रेन में कुल 1128 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसके पहले वंदे भारत की पहली ट्रेन नई-दिल्ली से बनारस के लिए और दूसरी ट्रेन नई दिल्ली से कटरा माँ वैष्णो के लिए चलती थी। अब यह तीसरी वंदे भारत ट्रेन गुजरात गांधीनगर से लेकर महाराष्ट्र मुंबई सेंट्रल तक चलेगी। इस नई वंदे भारत की ट्रेन में लोगो की कोविड से सुरक्षा करने के लिए 'KAVACH' तकनीक का उपयोग किया गया है। KAVACH (train collision avoidance system) तकनीक से आमने-सामने की ट्रेनों से होंने वाली दुर्घटना से बचा जा सकता है। यह ट्रेन 0 से 100 किलोमीटर तक की चाल मात्र 52 सेकंड में प्राप्त कर लेगी। 

  

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