सेनेटरी पैड मांग करने वाली स्कूल लड़की के साथ बिहार में क्या हुआ

सेनेटरी पैड मांग करने वाली स्कूल लड़की के साथ बिहार में क्या हुआ

बिहार सरकार बिहार राज्य में लैंगिंग समानता को बनाये रखने के लिए मुफ्त सेनेटरी पैड को बच्चियों में मुफ्त बाट रही थी। सरकार के जवाब में आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बमराह ने सरकार को पैड की जगह लड़कियों के शौचालय की व्यवस्था, मरम्मत और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कहा है।


बिहार सरकार ने भारतीय लैंगिंग असमानता को मिटाने के लिए बच्चियों में सैनेटरी पैड को बांट रही है। इन सब को देखते हुए आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बमराह ने टिप्पणी कस्ते हुए कहा कि सरकार को सेनेटरी पैड की जगह लड़कियों के शौचालय की व्यवस्था, मरम्मत और सुरक्षा को बढ़ाया जाये, जिससे लड़कियां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरजोत कौर के खिलाफ जांच का आदेश दे दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी जवाब तलब किया है कि एमडी के खिलाफ कार्यवाही हो और उसके बाद पिछले अन्य वाक्य की तरह समय के साथ यह मामला भी लोगों के जहन से निकल जाएगा। अगर सरकार की ओर से स्कूलों में सैनिटरी पैड के वितरण का प्रावधान है, तो इसकी जानकारी उस छात्रा को क्यों नहीं थी। जिसने अभी तक स्कूल में पानी कम पीकर काम चलाया है। 

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बिहार सरकार ने 2015 में लड़कियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा ड्रॉप आउट को कम करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में आठवीं से दसवीं कक्षा तक की लड़कियों को सैनिटरी पैड की खरीद के लिए सालाना 150 रुपये की राशि देने का प्रावधान किया गया था, जिसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों की करीब 40 लाख छात्राओं को इस योजना का लाभ मिल रहा है पर उनको अभी मिल नहीं पाया है। 

लगातार यदि सेनेटरी पैड का उपयोग इसी प्रकार होता रहा तो पर्यावरण में सेनेटरी पैड ही दिखाई देंगे। सैनेटरी पैड में प्लास्टिक का उपयोग अधिक हो रहा है। इन सब को देखते हुए कई देशो में सेनेटरी पैड का उपयोग कम किया जा रहा है और इसकी जगह पर कई प्रकार के मासिक धर्म से बचने के लिए मेंस्ट्रुअल कप, टेम्पोंस आदि का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन जहाँ तक देखा जाये तो टेम्पोंस कूड़े को बढ़ाता है जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इस प्रदूषित वातावरण को बचाने के लिए सभी देश को मेंस्टुअल कप का उपयोग करना चाहिए, जिससे पर्यावरण सुरक्षित होगा। मेंस्टुअल कप का इस्तेमाल करने में स्त्रियों को पहले तो समस्या उत्पन्न होती है परन्तु रोजाना इस्तेमाल से रूटीन  में आ जाता है। एक मेंस्टुअल कप लगभग 20 सेनेटरी पैड लगभग कवर करता है। इसलिए स्त्रियों को मासिक धर्म में महामारी से बचने के लिए सस्ता के साथ पर्यावरण की रक्षा को भी बनाये रखने के लिए मेंस्टुअल कप का प्रयोग करना चाहिए। 

 

 

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