प्रसिद्ध साहित्यकार तेमसुला आओ की हुई मृत्यु

प्रसिद्ध साहित्यकार तेमसुला आओ की हुई मृत्यु

प्रसिद्ध साहित्यकार तेमसुला की मृत्यु 09 अक्टूबर को हो गयी। तेमसुला आओ भारत की एक सुप्रसिद्ध कवियत्री रही है। तेमसुला आओ का जन्म अक्टूबर 1945 में असम के जोरहाट में हुआ। उनके पिता इनामहथोंगबा चांगकीरी जोरहाट स्थित बड़भिट्टा ईसाई अस्पताल में सुपरवाइजर थे। मां नोक्सिंटेम्ला लॉन्गकूमर हाउसवाइफ थीं। छोटे भाई के जन्म के थोड़े ही दिनों बाद कुछ महीनों के अंतराल पर उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। मैट्रिक की पढ़ाई के दिनों में डॉ. आओ की शादी हो चुकी थी पर आगे चलकर दोनों में अलगाव हो गया।

 

तेमसुला आओ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में स्कूल पर और घर में रहकर की और गोलाघाट रीगावे गर्ल्स हाई स्कूल से हाई स्कूल तथा असम से उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इसके बाद फजल अली कॉलेज, मोकोचुंग, नागालैंड से बी.ए. का अध्ययन विशिष्टता के साथ पूरा किया। गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम से अंग्रेजी में एम.ए. करने के बाद उन्होंने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज हैदराबाद से अंग्रेजी शिक्षण में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया और पीएचडी नॉर्थ ईस्टर्न हिल युनिवर्सिटी से की। 1985-86 में वह फुलब्राइट फेलो के रूप में मिनेसोटा विश्वविद्यालय में रहीं तथा 1992-97 तक प्रतिनियुक्ति पर पूर्वाेत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, दीमापुर की निदेशक के रूप में कार्य किया। 21 दिसंबर 2012 में नागालैंड सरकार ने उन्हें राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया। तब से अब तक वे इस पद पर रहते हुए कार्य कर रही हैं। 2007 में उन्हें पद्म श्री का सम्मान मिला। मेघालय सरकार द्वारा 2009 में इन्हे राज्यपाल स्वर्ण पदक से भी विभूषित किया गया। तेमसुला आओ अंग्रेजी साहित्य में पूर्वाेत्तर भारत की एक प्रमुख आदिवासी आवाज मानी जाती हैं। तेमसुला आओ ने अपने जीवनकाल में कविता संग्रह, कहानी संग्रह, उपन्यास और संस्मरण लिखे हैं जिन पर पद्मश्री, राज्यपाल स्वर्ण पदक, साहित्य अकादमी अवार्ड और कुसुमाग्रज राष्ट्रीय साहित्य सम्मान प्राप्त किया है। ऐसी सुप्रसिद्ध कवियत्री और लेखिका अब हमारे बीच में नहीं रही जिसपर पीएम मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है। 

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