जानें कैसा रहा 'धरतीपुत्र' का सियासी सफर, कैसे छुआ सियासत का आसमान

जानें कैसा रहा 'धरतीपुत्र' का सियासी सफर, कैसे छुआ सियासत का आसमान

देश की राजनीति में धरतीपुत्र के नाम से प्रसिद्ध मुलायम सिंह यादव का देहावसान 10 अक्टूबर 2022 को सुबह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हो गया। जिनके शोक में यूपी सरकार के आदेश द्वारा 3 दिनों का शोक दिवस मनाया जायेगा। मुलायम सिंह यादव का पार्थिव शरीर सैफई के लिए लाया जा रहा है। इस पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार 11 अक्टूबर को मनाया जायेगा। 

 

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यूपी के इटावा जिले के सैफई गाँव में मूर्ति देवी व सुघर सिंह यादव के किसान परिवार में मुलायम सिंह यादव का जन्म हुआ था। मुलायम सिंह यादव एक गरीब परिवार में जन्म लेने के बावजूद वो अपनी लोकप्रियता और सहिष्णुता को लोगो के मन में बनाने में सफल रहे हैं। अपने इसी अंदाज की वजह से मुलायम सिंह यादव 'धरतीपुत्र' यूपी में तीन बार मुख्यमंत्री क्रमशः 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक, 5 दिसम्बर 1993 से 3 जून 1996 तक और 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तथा एक बार केन्द्र सरकार में 1996-1998 रक्षा मन्त्री तथा 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 8 बार विधायक और 7 बार सांसद तथा 2 बार सहकारिता और पशुपालन मंत्री 1977 कैबिनेट मंत्री रहे हैं। 

 

उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में मुलायम सिंह ने साहसिक योगदान किया है। मुलायम सिंह की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में मुलायम सिंह यादव को प्यार से नेता जी कहा जाता है।सामाजिक चेतना के कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण स्थान है। समाजवादी नेता रामसेवक यादव के प्रमुख अनुयायी थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से मुलायम सिंह यादव 1967 में पहली बार विधान सभा के सदस्य चुने गये और यूपी के मन्त्री बने। वर्ष 2012 में पहली बार समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनायी जिसमे समाजवादी ने पूर्ण रूप से बसपा के द्वारा परेशान किये गए लोगों को जागरूक किया और अपनी पार्टी को पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। वर्ष 2012 में अखिलेश सिंह यादव को सपा ने अपना मुख्यमंत्री नियुक्त किया जिनका कार्यकाल 2012 से लेकर 2017 तक रहा। 

 

केंद्रीय राजनीति में मुलायम सिंह का प्रवेश 1996 में हुआ, जब काँग्रेस पार्टी को हरा कर संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। एच. डी. देवेगौडा के नेतृत्व वाली इस सरकार में वह रक्षामंत्री बनाए गए थे, किंतु यह सरकार भी ज़्यादा दिन चल नहीं सकी और तीन साल में भारत को दो प्रधानमंत्री देने के बाद सत्ता से बाहर हो गयी। 'भारतीय जनता पार्टी' के साथ उनकी विमुखता से लगता था, वह काँग्रेस के नज़दीक होंगे। 1999 में धरतीपुत्र का समर्थन का आश्वासन ना मिलने पर काँग्रेस सरकार बनाने में असफल रही और दोनों पार्टियों के बीच सम्बन्ध बिगड़ गए। 2002 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 391 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, जबकि 1996 के चुनाव में उसने केवल 281 सीटों पर ही चुनाव लड़ा था। मुलायम सिंह यादव राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में अटूट आस्था रखते थे। मुलायम सिंह यादव ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, पोलैंड और नेपाल आदि देशों की यात्राएँ की हैं। 

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