जमीनी विवाद कानपुर पुलिस के लिए छोटा मैटर , फिर कैसे मिलेगा न्याय....?

जमीनी विवाद पुलिस के लिए छोटा मैटर , एडीसीपी बोली छोटे मैटर......

जमीनी विवाद कानपुर पुलिस के लिए छोटा मैटर , फिर कैसे मिलेगा न्याय....?

कानपुर :: उत्तर प्रदेश सरकार का बुलडोजर वैसे तो भू माफियाओं द्वारा अवैध बनाई गई बिल्डिंग ऊपर खूब चलता है। लेकिन फिर भी उत्तर प्रदेश के कानपुर में भू माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि रातों-रात घर में रखा सामान लूट कर और घर में अपना कब्जा जमा लेते हैं। मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर के नौबस्ता हनुमंत विहार थाना क्षेत्र का है। जहां पर मकान नंबर 78 योगेंद्र बिहार खाडेपुर रोड पाल चौराहा के निकट बने एक मकान पर रातो-रात भू माफियाओं द्वारा घर का सामान पार कर और ताला लटका दिया गया। जब मकान स्वामी को इस बात की जानकारी हुई। तो उन्होंने वहां जाकर देखा तो मकान में तोड़फोड़ हो चुकी थी। साथ-ही-साथ मकान के अंदर रखा सामान भी गायब था। जिसमें स्कूटी भी शामिल है।

पीड़ित ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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कानपुर के हनुमंत विहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत योगेंद्र विहार में मुन्ना लाल गुप्ता का मकान था। जिसमें वह अपना कारखाना चलाते थे। स्वास्थ्य सही ना होने के कारण उन्होंने योगेंद्र बिहार वाला मकान छोड़ अपने बेटे के साथ किदवई नगर में रहने लगे। लेकिन तभी उनके खाडेपुर वाले मकान में भू माफियाओं द्वारा कब्जा कर लिया गया और साथ ही साथ उसमें रखे सामान पर भी हाथ साफ कर दिया। जब इसकी जानकारी मकान स्वामी को हुई। तो उसकी पत्नी गुड्डी गुप्ता ने पुलिस को जानकारी दी। मामला दर्ज किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई ‌। पीड़िता परेशान थी। तब जाकर पीड़ित महिला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई। और पूरे घर पर पोस्टर चिपका दिए जिसमें लिखा था "योगी जी मेरा मकान बचाओ" 

किसी की जीवन की कमाई पर हो जाए कब्जा, पुलिस को लगता है छोटा मैटर

जब इस संबंध में एडीसीपी साउथ अंकिता शर्मा से बात की गई और मामले के संबंध में वीडियो बाइट की बात कही। तो उनके द्वारा कहा गया कि छोटा मैटर है इस पर वाइट नहीं देंगे। बहुत छोटा मामला है पुलिस ने एफ आई आर दर्ज कर ली है आरोपियों की तलाश कर रही है। सोचने वाली बात है कि कोई जीवन भर कमाकर एक आशियाना बनाता है। जिसमें वह अपने परिवार के साथ रह सके। तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस मामले की सुनवाई नहीं करती। जब मीडिया द्वारा मामले को प्रमुखता से दिखाया जाता है। तब पुलिस एक्शन मोड में आती है। नहीं पहले तो सिर्फ F.I.R लिख ली गई थी और एफ आई आर वाली फाइल किसी टेबल पर धूमिल हो रही थी। क्योंकि अभी तक पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। और तो और कब्जा किए हुए मकान में एक ताला कब्जा करने वाले का लगा हुआ था और जानकारी मिलने के बाद दूसरा ताला मकान मालिक ने अपना लगा दिया था। दो तालों के बीच न्याय लटक रहा था और सिर्फ थाने में थी तो एफ आई आर अब इस कार्यशैली को क्या कहेंगे नहीं कहा जा सकता लेकिन जब पुलिस से इस मामले के बारे में पूछा गया तो सिर्फ जवाब मिला छोटा सा मामला है। तो अगर यही मानसिकता रही तो कैसे पीड़ित को न्याय दिला पाएगी कानपुर पुलिस।

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