अब पराठो का बिगड़ेगा स्वाद, चुकाना होगा 18% GST

अब पराठो का बिगड़ेगा स्वाद, चुकाना होगा 18% GST

देश में एक समान वस्तु व सेवा शुल्क GST प्रणाली 07 जुलाई 2017 को लागू हुई थी। अब तक इसके पांच साल पूरे हो चुके हैं। इस पांच साल के बाद रोटी पर 5% व पराठे पर 18% जीएसटी दर कर दी गयी है जिससे अब पराठा का स्वाद लेना महंगा पड़ेगा। 


देश में अब आप यदि पराठा खाना चाहते हैं तो आपको 18% GST चुकाना पड़ेगा लेकिन यदि आप रोटी खाना चाहते हैं तो उसमे केवल 5% GST चुकानी पड़ेगी। GST के उतर चढ़ाव को देखते हुए दिन प्रतिदिन विवाद सामने आते रहते हैं। ऐसा ही मामला रोटी व पराठे पर अलग-अलग जीएसटी दरों का सामने आया है जिसमे खाने के एक वस्तु में GST अलग अलग लगना विवाद का कारण बन गया है। 


फ्रोजन रोटी-पराठे पर जीएसटी को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं। इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों का कहना है कि दोनों को बनाने की मूल सामग्री गेहूं का आटा है। इसलिए पराठे और रोटी पर समान जीएसटी लागू होना चाहिए। मालाबार पराठे में आटे की मात्रा 62 फीसदी और मिक्स्ड वेजिटेबल पराठे में 36 फीसदी होती है। जबकि गुजरात GST  प्राधिकरण ने कहा कि रोटी रेडी टू ईट है, जबकि कंपनी का पराठा रेडी टू कुक है।


GST प्राधिकारियों का साफ कहना है कि पराठा रोटी से पूरी तरह अलग है। रोटी या चपाती को आप बगैर मक्खन या घी लगाए खा सकते हैं, लेकिन पराठा इनके बगैर नहीं बनता है। घी चुपड़ी रोटी या पराठा एक तरह से विलासिता की श्रेणी में आते हैं और  इन पर 18 फीसदी की दर से कर वसूलना जायज है। इसी तरह से गुजरात के GST प्राधिकारियों ने फ्लेवर्ड दूध पर 12 फीसदी जीएसटी को वैध माना है जबकि दूध पर कोई कर नहीं लगता है। इसके अलावा रेडी टू कुक डोसा पर 18% GST व बटर पर 5% GST लगती है। इसके अलावा तमिलनाडु के GST प्रशासन रेडी टू कुक डोसा, इडली और दलिया मिक्स आदि पर 18% GST लगाता है जबकि डोसा या इडली बनाने के तैयार घोल के तौर पर बेचने पर 5% GST लगाता है।

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