जानिए क्या वास्तव में वानर सेना द्वारा बनाया गया था रामसेतु , रामसेतु की पूरी कहानी

जानिए क्या वास्तव में वानर सेना द्वारा बनाया गया था रामसेतु  , रामसेतु की पूरी कहानी

"इतिहास रामसेतु" :: रामसेतु ब्रिज का जिक्र कई पुराणों में किया गया है। आज हम आपको रामसेतु ब्रिज के बारे में विस्तार से बताएंगे। रामसेतु ब्रिज तमिलनाडु के पंबन आइलैंड को श्रीलंका के मन्नार आइलैंड से जाेड़ता है। रामसेतु का संबंध रामायण से है। पुराणों में जिक्र किया गया है कि श्रीराम और उनकी वानर सेना ने माता सीता को रावण से मुक्‍त कराने के लिए एक पुल बनाया था। जिसे रामसेतु नाम दिया गया। 

कई वर्षों से इस बात पर बहस चल रही है कि रामसेतु प्राकृतिक है या इसे भगवान श्री राम की वानर सेना के द्वारा बनाया गया है। हालांकि राम सेतु आज भी एक रहस्‍य है। यही वजह है कि आज भी लोग इस सेतु के बारे में जानने में दिलचस्‍पी रखते हैं। तो आइए जानते हैं रामसेतु से जुड़ी वो बातें, जिन्‍हें जानना जरूरी है। 

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आखिर क्या है रामसेतु का इतिहास....

वाल्मीकि की रामायण में राम सेतु का जिक्र किया गया है। और कहां गया है कि करते हुए पत्थरों को जो समुद्र में बालों की सेना ने डाला था तो वह तैरने लगे थे। जिसे जोड़कर राम सेतु का निर्माण किया गया। हैरानी की बात यह है कि ऐसे तैरते हुए पत्‍थर आज भी रामेश्वरम में देखे जाते हैं। वैसे आज रामसेतु को कई नामों से जाना जाता है। जैसे एडम ब्रिज, नाला सेतु और सेतु बांध। इसे नाला सेतू इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पुल बनाने का विचार वानर सेना के एक सदस्‍य नाला ने ही अन्‍य सदस्‍यों को दिया था। इसलिए नाला को रामसेतु का इंजीनियर भी कहते हैं। जबकि एडम्स ब्रिज का नाम कुछ प्राचीन इस्लामी ग्रंथों से आया है।

गौरतलब है कि बाल्मीकि रामायण में सर्वप्रथम प्रसिद्ध रामसेतु ब्रिज पौराणिक रूप से यह ब्रिज भगवान राम की वानर सेना द्वारा निर्मित माना जाता है। सेना के एक वानर नाला थे, जिन्होंने सेना के अन्य सदस्यों को पुल बनाने का निर्देश दिया था। रावण से अपनी पत्नी सीता को बचाने के लिए भगवान राम को लंका पहुंचने में मदद करने के लिए पुल का निर्माण किया गया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसे भगवान राम ने वानर सेना की मदद से बनवाया था। उन्हें श्रीलंका पहुंचने के लिए इस पुल का निर्माण करना पड़ा। दरअसल, रावण ने भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण कर उन्हें वहीं कैद कर लिया गया था। हैरानी की बात यह है कि रामायण (5000 ईसा पूर्व) का समय और पुल का कार्बन एनालिसिस का तालमेल एकदम सटीक बैठता है। हालांकि, आज भी ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह बताता है कि पुल मानव निर्मित है। 15 वीं शताब्दी तक, पुल पर चलकर जा सकते थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि, 1480 तक पुल पूरी तरह से समुद्र तल से ऊपर था। हालांकि, प्राकृतिक आपदाओं ने पुल को समुद्र में पूरी तरह से डुबो दिया। इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि रामसेतु प्राकृतिक चूना पत्थर के शोल से बना एक पुल है।

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