अन्नकूट महोत्सव पर भगवान को लगा 56 पकवानों का भोग, गर्भ गृह के बाहर आकर ​दिये दर्शन

अन्नकूट महोत्सव पर भगवान को लगा 56 पकवानों का भोग, गर्भ गृह के बाहर आकर ​दिये दर्शन

कानपुर। शहर के केंद्र शिवाला में स्थित महाराजा प्रयाग नारायण मंदिर में आज धूमधाम के साथ अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव के दौरान विष्णु भगवान को 56 तरह के प्रसाद व चावल का भोग लगाया जाता है। 

तीन भाग में प्रस्तुत हुए 56 भेाग

भगवान के सामने तीन भाग में 56 भेाग प्रस्तुत किये गये। प्रथम भाग में हलुवा, दूध, मलाई, मक्खन, मिसरी, मेवा, रबड़ी, दूध आदि का भोग। दूसरे भाग में गुझिया, पेड़ा, बर्फी, चीनी से पके हुए पकवान, नमकीन, पापड़ी, समोसा, खीर, पूड़ी आदि का भोग, और तीसरे भाग में दाल, चावल, कड़ी, रोटी, चावल का कच्चा खाना प्रस्तुत किया गया। 

दक्षिण भारतीय शैली पर बने मंदिर में 156 साल पुरानी परंपारा के अनुसार सबसे पहले भगवान लक्ष्मी नारायण के पट बंद कर भोग आरती की गई। नारद पांच रात्रि विधि से हो रहा पूजन सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा। पूजन के दौरान तमिल भाषा में मंत्रों से लक्ष्मी स्तुति हुई। इसके बाद हुई तुलसी अर्चना में चार वेदों के मंत्रों से प्रभु की आराधना की गई। जिस समय प्रभु का मंत्रों से आह्वान हो रहा था उस वक्त पूरी शिवाला मार्केट मंदिर से बजाए जा रहे घंटे से गूंज रही थी।
 

पूजन के दौरान मंदिर में एक साथ दो भाषओं के मंत्र लोगों को चकित कर रहे थे। भोग आरती के समय मंदिर के गर्भगृह में तमिल जबकि बाहर संस्कृत भाषा में श्लोक पढ़े जा रहे थे। खास बात यह रही कि दोनो भाषा के मंत्रों को उत्तर भारतीय पुजारी ही पढ़ रहे थे। मंदिर के पदाधिकारियों ने कहा कि इस पूजन के लिए पुरोहितों को बाकायदा दो या तीन साल दक्षिण भारतीय शैली के पूजन के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

दक्षिण भारत की झलक दिखी

मंदिर से वितरित हुए 56 प्रकार के भोग में भी दक्षिण भारत की झलक दिखाई दी। प्रसाद में चावल, रसाजे, देशी घी की खीर, लौंग व जायफल का चरणामृत, कढ़ी दक्षिण भारतीय शैली से बने हुए थे। समारोह में शामिल लोगों के मस्तक में भी उसी शैली का श्रीतिलक चमक रहा था। उधर मंदिर के पदाधिकारी भी लुंगी व कुर्ते को धारण कर ही शामिल हुए थे।
 

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