कैट ने साधा आईआईएफटी पर निशाना, बताया फ्लिपकार्ट का मुखौटा

कैट ने साधा आईआईएफटी पर निशाना, बताया फ्लिपकार्ट का मुखौटा

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज "ई-कॉमर्स मेजर्स, एसएसआई  रिटेलर्स एंड इंडियन इकोनॉमी" पर अगस्त, 2022, को भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विदेश व्यापार (आईआईएफटी) द्वारा जारी एक रिपोर्ट की  कड़ी आलोचना की है, जिसमें कहा गया है कि ई-कॉमर्स ने व्यापारियों के लिए कुछ बुरा नहीं किया है है, बल्कि यह उनकी संरचनात्मक कमजोरी है जिसके कारण उन्हें सभी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि रिपोर्ट साफ़ तौर पर आईआईएफटी को फ़्लिपकर्ट का "हिज मास्टर्स वॉइस" करार देती हैं क्योंकि रिपोर्ट की फंडिंग फ्लिपकार्ट इंडिया द्वारा की गई है। यह अजीब है कि वाणिज्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय एक ऐसी कंपनी से धन ले रहा है जिस पर विभिन्न सरकारी संस्थानों द्वारा कदाचार का आरोप लगाया गया है और ज़ाहिर बात है की वो उस कंपनी की ही वकालत करेगी  जिसने अनुसंधान और रिपोर्ट को फण्ड किया है।

बी सी भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि आईआईएफटी ने 1963 से अपने मूल क्षमता क्षेत्र विदेश व्यापार में क्या कुछ किया  है उसे  पूरा देश जानता है। यह पीएम मोदी का नेतृत्व और वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल द्वारा किए गए बड़े रचनात्मक कार्य हैं जिनसे आज देश में विदेशी व्यापार फल रहा है । आईआईएफ़टी बताये की वर्ष 1963 से 2013 तक विदेश व्यापार के क्षेत्र में उसकी क्या उपलब्धि है । इस प्रकार के संस्थान केवल सफ़ेद हाथी है ।आश्चर्य है के देश के आंतरिक व्यापार जिसका उसे तजुर्बा भी नहीं है उसमें रिसर्च कर एक रिपोर्ट जारी करता है और एमएसएमई और छोटे व्यापारियों पर आरोप लगाता है जो कई सवालों को जन्म देता है। ऐसा लगता है कि रिपोर्ट और कुछ नहीं बल्कि अपने आकाओं फ्लिपकार्ट को क्लीन चिट देने के लिए एक सुनियोजित दस्तावेज है, क्योंकि रिपोर्ट की फंडिंग फ्लिपकार्ट ने की है । 

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की कैट और विभिन्न अन्य व्यापार एसोसिएशनों ने समय समय पर ई कॉमर्स के मुद्दे पर शिकायत की हैं लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, आईआईएफटी ने इस मुद्दे पर उनमें से किसी से बात तक नहीं की क्योंकि अगर ऐसा होता, तो रिपोर्ट वर्तमान स्वरूप में फिर आ ही नहीं सकती थी ।उन्होंने कहा की  "हम केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल से वाणिज्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय से संबंधित इस गंभीर मुद्दे को देखने का आग्रह करते हैं"

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