तमिलनाडु के किसान ने हिंदी भाषा के विरोध में दी जान

तमिलनाडु के किसान ने हिंदी भाषा के विरोध में दी जान

भारत के उत्तर भारत में अकेले हिंदी भाषा बोली जाती है। भारत में लगभग 22 भाषाएँ बोली जाती हैं। भारत में मुख्या रूप से हिन्दी (राजभाषा), असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्न्ड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलुगू, नेपाली, पंजाबी, बंगाली, बोडो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथली या संताली, संस्कृत और सिन्धी है। 

दक्षिण भारत में एक किसान बुजुर्ग ने हिंदी भाषा के विरोध में आत्मदाह कर लिया है। बुजुर्ग किसान के अनुसार केंद्र सरकार पूरे देश में हिंदी को थोपना चाहती है, जबकि यह भाषा सिर्फ उत्तर भारत में बोली जाती है। बुजुर्ग किसान(85 साल) का नाम एमवी थांगवेल था। शनिवार को एमवी थांगवेल ने अपने ऊपर पेट्रोल और केरोसिन छिड़क कर आग लगा ली। थांगवेल ने एक तख्ती अपने हाथ में ले रखी थी जिस पर लिखा था, "मोदी सरकार हिंदी थोपना बंद करो। एमवी थांगवेल का कहना था की हमारे साहित्य में भरी तमिल के ऊपर सरकार को हिंदी को नहीं चुनना चाहिए। यह हमारे युवाओं के भविष्य को प्रभावित करेगा। 

आधे से कम लोग बोलते हैं हिंदी 

भारत में अलग-अलग राज्यों के होने से लगभग सभी राज्यों की अलग-अलग भाषाओं को मान्यता मिली है। इस तरह से भारत में सैकड़ों भाषाओं और बोलियों का दूसरे देशों की तरह ही भाषा एक भावनात्मक मुद्दा बना हुआ है। इतनी सारी भाषाओं के बीच यहां आधिकारिक रूप से कामकाज की मुख्य भाषा अंग्रेजी है। हालांकि लगभग सभी राज्य सरकारें स्थानीय भाषाओं का भी इस्तेमाल करती हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत के आधे से कुछ कम लोग यानी लगभग 44 फीसदी लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। जबकी दुनिया में सबसे ज्यादा अंग्रेजी भाषा भारत में बोली जाती है। पिछले महीने ही गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सांसदों के एक दल ने कथित रूप से हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक भाषा बनाने की मांग की थी। इसमें मेडिसिन और इंजीनियरिंग जैसी तकनीकी शिक्षा के लिए भी हिंदी को मुख्य माध्यम बनाने की बात थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल को "गुलाम मानसिकता" बताते रहे हैं और भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। 

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