प्रसिद्ध झण्डा गीत ​'विश्व विजय तिरंगा प्यारा' हुआ पाठ्यक्रम में शामिल

प्रसिद्ध झण्डा गीत ​'विश्व विजय तिरंगा प्यारा' हुआ पाठ्यक्रम में शामिल

देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों के दिल में जोश भरने वाले लोक​प्रिय झण्डा गीत को पुन: स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। झण्डा गीत के रचियता पदृमश्री श्याम लाल गुप्त 'पार्षद' के नाम पर बने पार्षद स्मृति संस्थान के समन्यवक सुरेश गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में चलने वाली किताबों में पहले झण्डा गीत शामिल रहता था, लेकिन बिना वजह के उसे हटा दिया गया था, झण्डा गीत को पुन: शामिल कराने के लिए राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपा गया था, जिस पर एक्शन लेते हुए पुन: इस जोशीले झण्डा गीत का उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के स्काउट एवं गाइड शिक्षा की किताब संख्या 140—141 पर शामिल किया गया है। 

क्या है झण्डा गीत 


विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

सदा शक्ति सरसाने वाला,

प्रेम सुधा बरसाने वाला

वीरों को हरसाने वाला

मातृभूमि का तन-मन सारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

स्वतंत्रता के भीषण रण में,

लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,

कांपे शत्रु देखकर मन में,

मिट जावे भय संकट सारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,

हो स्वराज जनता का निश्चय,

बोलो भारत माता की जय,

स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
 झंडा ऊंचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ,

देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,

एक साथ सब मिलकर गाओ,

प्यारा भारत देश हमारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पावे,

चाहे जान भले ही जावे,

विश्व विजय करके दिखलावे,

तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

नर्वल में जन्में, जनरलगंज को बनाया कर्मस्थली

श्याम लाल जी का जन्म कानपुर के नर्वल में 9 सितंबर 1895 को हुआ था। युवावस्था में वे जनरलगंज आ गये थे जहाँ से क्रांतिकारियों के साथ रहकर आजादी की लड़ाई लड़ी। यहां हुए कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने जवाहर लाल नेहरू के समक्ष जब झंडा गीत पढ़ा तो वह भी उत्साह से भर गये। उन्होंने उसके तीन अंतराओं को कांग्रेस के झंडा गीत के रूप में मान्यता दी। यह गीत आजादी की लड़ाई का एक बड़ा हथियार बना। 

आज भी कनपुरियों की जुबान पर यह गीत आज भी जिंदा है। आजादी की मध्यरात्रि यानी 14 अगस्त की रात ठीक 12 बजे मेस्टन रोड में बीच वाले मंदिर पर तिरंगा फहराकर यह गीत गाया जाता है। यह अलग बात है कि अब वह कार्यक्रम परंपरा के रूप में केवल कांग्रेसी बनकर रह गया है।

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