समुद्र में दुश्मन की नींद उड़ाने को नौसेना में शामिल हुई INS Vagir

समुद्र में दुश्मन की नींद उड़ाने को नौसेना में शामिल हुई INS Vagir

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्र में पानी के भीतर से युद्ध करने की क्षमता और बढ़ गई है। नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार की मौजूदगी में सोमवार को कलवरी श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी वागीर भारत की समुद्री सेना के युद्धक बेड़े में शामिल की गई। इस मौके पर नौसेनाध्यक्ष ने कहा कि पनडुब्बी की क्षमताओं और मारक क्षमता से न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि हमारी प्रतिरोधक क्षमता में भी मजबूती आएगी।

इस मौके पर एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि पनडुब्बी वागीर की कमीशनिंग से भारतीय नौसेना की परिचालन शक्ति और मजबूत होगी, साथ ही किसी भी दुश्मन से निपटने के लिए ताकत मिलेगी। आज का दिन नौसेना के लिए 'लड़ाकू-तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के बल' के रूप में भी महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि आज गहरे समुद्र का एक और प्रहरी नौसेना को मिल गया है। उन्होंने कहा कि नौसैनिक परंपरा है कि 'पुराने जहाज और पनडुब्बियां कभी मरती नहीं हैं।' उस भावना को ध्यान में रखते हुए यह पनडुब्बी पूर्ववर्ती वागीर का अवतार है, जिसने तीन दशकों तक प्रतिबद्ध प्रहरी के रूप में भारत और भारतीय नौसेना की सेवा की थी।

गहरे समुद्र की शिकारी है वागीर
नौसेनाध्यक्ष ने कहा कि वागीर का नाम 'सैंड शार्क' से लिया गया है, जो हिंद महासागर की एक घातक गहरे समुद्र की शिकारी है। अपने नए अवतार में भी अत्याधुनिक वागीर की क्षमताओं और मारक क्षमता से न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि हमारी प्रतिरोधक क्षमता में भी मजबूती आएगी। वागीर 24 महीने की छोटी सी अवधि में नौसेना में शामिल होने वाली तीसरी पनडुब्बी है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है और यह भारत के जहाज निर्माण उद्योग के लिए हमारे शिपयार्डों की विशेषज्ञता और अनुभव का एक चमकदार प्रमाण भी है। इससे 2047 तक भारतीय नौसेना को पूरी तरह से 'आत्मनिर्भर' बनाने के लिए हमारे राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिबद्धता भी झलकती है।

पहले भी 30 सालों तक नौसेना को सेवा दे चुकी है वागीर
पनडुब्बी वागीर का एक तरह से पुनर्जन्म हुआ है, क्योंकि इस नाम की पनडुब्बी का गौरवशाली अतीत रहा है। तत्कालीन वागीर को 01 नवंबर, 1973 को नौसेना में कमीशन किया गया था और लगभग तीन दशकों तक देश की सेवा करने के बाद 07 जनवरी, 2001 को वागीर पनडुब्बी सेवा से मुक्त कर दी गई थी। फ्रांस के सहयोग से मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित कलवरी श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी 12 नवंबर, 20 को लॉन्च की गई और यादों को जिन्दा रखने के लिए इसका नाम 'वागीर' रखा गया। अपने नए अवतार में आई 'वागीर' का निर्माण अब तक की सभी स्वदेशी पनडुब्बियों की तुलना में सबसे कम समय में किया गया है।

फ्रांस के सहयोग से मुंबई में तैयार हुई है वागीर

इन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण फ्रांस के सहयोग से भारत में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में किया जा रहा है। कलवरी श्रेणी की चार पनडुब्बियों को पहले ही भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है। पहली पनडुब्बी ‘कलवरी’ 21 सितम्बर, 2017 को नौसेना में शामिल हुई थी। दूसरी पनडुब्बी आईएनएस 'खंडेरी' 28 सितम्बर, 2019 को नौसेना में शामिल की गई थी। तीसरी पनडुब्बी आईएनएस करंज 10 मार्च, 21 को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से कमीशन की गई। प्रोजेक्ट-75 की चौथी पनडुब्बी 'वेला' पिछले साल 09 नवम्बर को मुंबई में भारतीय नौसेना को सौंपी गई थी, जिसे बेड़े में भी शामिल किया जा चुका है। अब पांचवीं स्वदेशी पनडुब्बी 'वागीर' नौसेना के बेड़े में शामिल कर ली गई। छठी पनडुब्बी भी एक उन्नत (एडवांस) चरण में है।

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