पंचग्रही योग में सोमवती अमावस्या, सूर्यग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव

पंचग्रही योग में सोमवती अमावस्या, सूर्यग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव

स्नान, दान-पुण्य व देव दर्शन के लिए अहम मानी जाने वाली सोमवती अमावस्या 14 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु पतित पावनी नदियों में स्नान करेंगे। कोरोना महामारी के कारण घाट पर नहीं जा पाने वाले लोग घरों में गंगाजल से स्नान कर देव दर्शन कर सकते हैं। सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही युति योग

स्नान, दान-पुण्य व देव दर्शन के लिए अहम मानी जाने वाली सोमवती अमावस्या 14 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु पतित पावनी नदियों में स्नान करेंगे। कोरोना महामारी के कारण घाट पर नहीं जा पाने वाले लोग घरों में गंगाजल से स्नान कर देव दर्शन कर सकते हैं। सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही युति योग बन रहा है। सोमवती अमावस्या पर वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, केतु की युति रहेगी। युति योग में दान, पुण्य व अनुष्ठान आदि करने का महत्व है।

साल का आखिरी सूर्यग्रहण, दिखेगा नहीं

सोमवती अमावस्या के दिन ही इस साल का आखिरी सूर्यग्रहण रहेगा। ग्रहण का समय सायंकाल 8 बजकर पांच मिनट से रात्रि 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। भारत में ग्रहण का प्रभाव, सूतक आदि नहीं रहेगा। ग्रहण का प्रभाव क्षेत्र प्रशांत महासागर, दक्षिणी अमेरिका आदि रहेंगे। ग्रहण यूरोपीय देशों पर शुभ व अशुभ फल देगा।


धनु में प्रवेश करेगा सूर्य, रोगनाशक योग बनेगा

15 दिसंबर को सूर्य धनु में प्रवेश कर जाएगा। सूर्य व धनु का मिलन रोगनाशक योग बनाएगा। मकर राशि में गुरु व शनि की युति उतार चढ़ाव का योग बनाएगी। देश के लिहाज से यह उन्नति कारक रहेगा।

इसलिए होता है सूर्य ग्रहण

सूर्य व पृथ्वी के बीच चंद्रमा के आने से सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए पृथ्वी के किसी भाग तक नहीं पहुंच पाती। इस दौरान सूर्य नहीं दिखाई देता या आंशिक दिखाई देता है। इस प्रक्रिया को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

प़ं आचार्य पवन तिवारी

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