लेटलतीफी व्यवस्था चर गई गरीबों की राशन दाल

लेटलतीफी व्यवस्था चर गई गरीबों की राशन दाल

राजस्थान।। प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते निजी क्षेत्र में काम करने वालों कामगारों के साथ ही विशेषकर दिहाड़ी से रोज कमाने खाने वाले लॉक डाउन के साथ ही बेरोजगार हो चुके है।कुछ परिवार ने बची कूची दो -चार हजार की रकम से अब तक किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर लिया

राजस्थान।। प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते निजी क्षेत्र में काम करने वालों कामगारों के साथ ही विशेषकर दिहाड़ी से रोज कमाने खाने वाले लॉक डाउन के साथ ही बेरोजगार हो चुके है।कुछ परिवार ने बची कूची दो -चार हजार की रकम से अब तक किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर लिया लेकिन अब उनकी रोटी-साग की व्यवस्था डगमगा गई है। प्रदेश की सेक्युलर सरकार के मुखिया अशोक गहलोत ने सभी राशनकार्ड धारियों को राशन देने की घोषणा की लेकिन घोषणा अभी तक कागजी ही साबित हो रही है।जब राशन डीलर वास्तविक सरकारी राशन के हकदारों का राशन ही नहीं डकार गए बल्कि राजनीतिक पहुंच के चलते राशन उपभोक्ताओं के माथे पर लाठी से वार कर लहूलुहान कर देते है ऐसे में उन कतिपय राशन डीलरों से यह कतई उम्मीद भी नहीं की जा सकती कि वे कमजोर वर्ग को अब भी सहज ही राशन दे रहे होंगे।मई माह में गरीब परिवार के मुखिया गले में साफी डालकर बड़े ही उत्साह के साथ एक हाथ में कट्टा (बोरी) और दूसरे हाथ में थैला लेकर गेंहू के साथ एक किलों दाल मिलने की खबर से उत्साहित होकर राशन डीलर के यहां राशन लेने पहुंचे।

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जहा प्रत्येक राशन कार्ड पर दोगुना गेंहू अवश्य मिला लेकिन थैला खाली ही रहा। वाकई दुगुना राशन देकर गरीब परिवार को बड़ी राहत दी है लेकिन दाल नहीं मिलने का उन्हें मलाल है।दरअसल गरीब परिवार के मुखिया यह उम्मीद लेकर राशन की दुकान पहुंचे थे कि सरकार की ओर से अब तक दिए गए गेंहू को पानी के साथ चबाकर निगलने से राहत मिलेगी।काफी समय बाद रोटी के साथ दाल मिलने से कुछ राहत मिलेगी लेकिन हो गया उनकी सोच के उल्टा।राशन डीलरों के पास दाल नहीं देने को लेकर कोई संतोषजनक जबाव नहीं मिलने से गरीब परिवार के मुखिया माथे पर चिन्ता लेकर गले में लटकी साफी से गर्मी में पसीने पोछते बिना दाल के ही खाली थैला लेकर अपनी झोपड़ी में बैरंग लौट आए।सनद रहे सम्बंधित विभाग ने अभी तक मीडिया के माध्यम से यह स्पष्ट नहीं किया है कि गरीबों की एक किलों दाल फाइलों में ही चल रही है या फिर फाइलों पर बड़े साहब के दस्खत होकर जल्द राशन की दुकानों पर पहुंचने वाली है।हालांकि लोगों को उम्मीद है कि जब पॉश मशीन में दाल का ऑप्शन जनरेट हो ही चुका है तो राशन डीलरों और सम्बंधित विभाग के कतिपय कर्मचारियों की मिलीभगत के बावजूद भी थोड़ी बहुत दाल अवश्य मिलेगी

उल्लेखनीय है कि सरकार ने हाल ही में यह भी घोषणा की थी पात्र परिवारों के अलावा उन राशनकार्ड धारकों को भी राशन दिया जाएगा जिन्हें अभी तक राशन का गेंहू नहीं मिल रहा था।असल में जिन चतुर लोगों की विभाग में अच्छी खासी पकड़ थी उन्होंने बीपीएल कार्ड तक बनवा लिए लेकिन झोपड़ी में अंधेरे में रहने वाली मेरी उस अस्सी वर्षीय विधवा अम्मा को राशन के लिए आज तक पात्र ही नहीं माना गया जो वास्तव में सरकारी राशन के अलावा उन तमाम सरकारी योजनाओं की वाकई वास्तविक हकदार है जिन्हें गरीबों के लिए सरकार ने चला रखी है।बहरहाल असहाय और कमजोर वर्ग को दाल के साथ रोटी खाने की उम्मीद अभी तक अवश्य बंधी हुई है लेकिन यह दाल उनके चूल्हे तक कब पहुंचेगी और सभी राशनकार्ड धारकों को भी राशन सामग्री कब से मिलना शुरू होगी उसकी निश्चित तिथि या अनुमानित तिथि शासन और प्रशासन ही ठीक तरीके से बता पाएगा।

विशेष रिपोर्ट संवाददाता- राजीव श्रीवास्तव की कलम से

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