आज मजदूर दिवस है और मैं मजदूर हूं और मजबूर भी हूं

आज मजदूर दिवस है और मैं मजदूर हूं और मजबूर भी हूं

आज 1 मई आज मजदूर दिवस है यह पहला मौका होगा जब श्रमिकों को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं होगा लाखों मजदूर अपने घर से दूर लॉकडाउन में बसे हैं देश में 25 मार्च से ही रेलवे, बस सेवाएं बंद है परंतु मैं मजदूर हूं परंतु मेरी कोई सुनने वाला नहीं है क्योंकि मैं मजबूर हूं

आज 1 मई आज मजदूर दिवस है यह पहला मौका होगा जब श्रमिकों को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं होगा लाखों मजदूर अपने घर से दूर लॉकडाउन में बसे हैं देश में 25 मार्च से ही रेलवे, बस सेवाएं बंद है परंतु मैं मजदूर हूं परंतु मेरी कोई सुनने वाला नहीं है क्योंकि मैं मजबूर हूं क्योंकि इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय भी सबसे ज्यादा दुखी और पीड़ित मैं मजदूर हूं क्योंकि वैसे तो सरकार की तरफ से कई सारी योजनाएं चलती है परंतु मैं मजदूर हूं मुझे इस संबंध में आज दिन तक कोई जानकारी नहीं चल पाई है क्योंकि मैं एक मजबूर और मजदूर हूं कहने को तो जिले में कई कल कारखाने हैं परंतु मेरे शोषण के सिवा वहां कुछ नहीं है क्योंकि मैं मजदूर हूं और मजबूर हूं । ओर मजदूर मजदूर ही होता चला गया और जो मजदूरों को चलाने वाले वह आज बहुत आगे चले गए हैं परंतु उनको आज भी मजदूरों की कोई चिंता नहीं है उनको तो केवल अपने काम से मतलब है क्योंकि मजदूरों के लिए आज सोचने वाला कोई नहीं है केवल मजदूर दिवस पर बड़े-बड़े आयोजन करवा कर 1 दिन के लिए मजदूरों को खाना खिला कर उनका सम्मान करके उनके द्वारा केवल इस तरह की इतिश्री कर ली जाती है परंतु दूसरे दिन से ही वह वापस मजदूर होकर रह जाता है क्योंकि वह एक मजदूर, एक मजबूर है इस समय समस्त जिलों में कहीं संगठन मजदूरों के लिए काम कर रहे हैं परंतु उनको आज भी मजदूरों की चिंता नहीं है क्योंकि जो मजदूर 20 साल से काम कर रहा है वही आज भी वह मजदूर हैं ओर वह यह सोचते मैं न जाने वह कब मालिक बनेगा ,इसका तो शायद उसको 7 पीढ़ियो तक भी इंतजार रहेगा क्योंकि जो उन से काम लेते हैं वह आज जो इनके ठेकेदार बनकर घूम रहे हैं और इनके लिए वह मजदूर लगातार अपने पसीने से उनकी खुशियों के लिए फैक्ट्री हो कल कारखाने हो या कोई ऑफिस हो या कमठाना के मजदूर हो वह आज भी मजदूर है क्योंकि वह मजबूर है इस तरफ कभी किसी संगठनों ने ध्यान नहीं दिया ओर उनकी मजबूरियों का फायदा ही उठाया है कहीं बाहर तो मजदूरों द्वारा आंदोलन किए जाते हैं परंतु उन प्रभावशाली लोगों द्वारा उनके आंदोलन को दबा दिया जाता है क्योंकि वह मजदूर हैं और मजबूर हैं फिर भी उन प्रभावशाली लोगों द्वारा उनके परिवार का भरण पोषण करने, उनके बच्चों की शिक्षा के लिए, उनके स्वास्थ्य के प्रति आज भी कोई जागरूक नहीं है क्योंकि वह एक मजदूर है और मजबूर है

डेस्क राजस्थान

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