जालौन : प्रदेश सरकार लाख दाबे करें प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त रखने की लेकिन वास्तविकता में प्रदेश की अस्पतालों की हालत कुछ अधिकारियों के चलते बदहाल होती जा रही है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन से सामने आया है।

प्रदेश के बेहाल अस्पताल

यह बात बुधवार की शाम लगभग 6 बजे की है। जब कुछ पत्रकार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुरा में समाचार कवरेज करने पहुंचे जहां पर उन्होंने प्रसूता महिलाओं से अस्पताल में मिलने वाली सुविधायें जैसे खाना व दवा के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी।

अपनी कमियां छुपाने के लिए पत्रकारों को ही ठहरा दिया दोषी

कवरेज की जानकारी जब चिकित्साधिकारी को मिली जो उस दौरान अस्पताल में नहीं थे। तो उनके द्वारा आनन फानन में रामपुरा थाने में तहरीर दे डाली। जिस पर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।

इस मामले में हैरानी की बात तो यह है कि यदि चिकित्साधिकारी अपनी ताकत का इस्तेमाल अस्पताल में व्याप्त खामियों को दूर करने में लगाते तो उसका लाभ ग्रामीणांचल के मरीजों को मिल सकता था लेकिन उनके द्वारा ऐसा न कर कलमकारों पर ही दबाब बनाने का हथकंडा अपना जो कहीं से भी उचित नहीं माना जा सकता।

मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों जब कुछ पत्रकार रामपुरा अस्पताल में पहुंचे तो वहां पर देखा कि ड्यूटी पर तैनात नर्स लगभग एक घंटे से फोन पर व्यस्त दिखी। अगर इस 1 घण्टे के बीच किसी महिला या किसी शिशु को कोई दिक्कत होती तो कौन जिम्मेदार होता।

नहीं मिला अस्पताल में पानी भी….

इसके बाद महिला नर्स से जानकारी के अनुसार बुधवार की शाम तक चार महिलाओं की डिलिवरी हो चुकी है। चारों प्रसूता महिलायें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुरा में ही थी। जब महिलाओं से जानकारी ली गयी कि आपको नास्ते व खाने में क्या मिला। तो चारों महिलाओं ने साफ इनकार कर दिया कि दो दिनों से मुझे पानी तक नही मिला। अस्पताल से खाना की तो दूर की बात है। एक महिला ने ये भी बताया कि दर्द की गोली तक बाहर के मेडिकल से लेकर आये। इसके बाद डयूटी पर मौजूद महिला नर्स से पूछा गया कि इन महिलाओं को खाना कितने समय से आयेगा तो उसने बताया कि योगेंद्र खाना लेकर आता है। उसकी शादी है जब योगेंद्र से पत्रकारों ने बात की तो उसके तेवर ही अलग ढंग से देखने को मिले। उसने बोला कि मैं डॉक्टर अमित कुमार को बता चुका हूं कि मेरी शादी है। मैं तीन दिन खाना नहीं दे सकता हूं। तो उन्होंने कहा ठीक है। लेकिन इन तीन दिनों में भूख से किसी मरीज की मृत्यु होती है कौन जिम्मेदार होगा।

इसी क्रम में योगेंद्र द्वारा बोला कि तुम लोगों को जो करना है, वो कर लो। मेरा कोई कुछ नही कर सकता। जबकि महिलाओं से की गई वार्ता हम लोगों के मोबाइल फोन में टैप है। चिकित्साधिकारी डॉ. अमित कुमार को फोन लगाने पर न तो वो फोन उठाते है न ही वापस करते है। विगत दिनों पहले पत्रकारों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुरा का निरीक्षण किया था तो चिकित्साधकारी अमित कुमार द्वारा पत्रकारों को अपने केविन में बुलाकर धमकी दी गयी थी कि अगर अस्पताल का निरीक्षण किया तो अरेस्ट करवा दूंगा। समाज को आईना दिखाने वाले कलमकारों पर जानलेवा हमला करवाना यह सिद्ध कर रहा है कि अंदर सिर्फ मरीजों के जीवन से खिलवाड़ की जाती है।

  • रिपोर्ट : राजकुमार दोहरे