पत्रकार की पत्नी ने दी प्रशासन को चेतावनी 2 दिन में गिरफ्तार नहीं हुए हत्यारे तो करेगी आत्मदाह

बलरामपुर : उत्तर प्रदेश में बेखौफ होते अपराधी और अपराध चरम सीमा पर पहुंच गया है। उत्तम प्रदेश की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश अपराधियों का प्रदेश बनता जा रहा है। जैसे पहले कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में अपराधी नहीं रह सकते लेकिन कुछ दिनों से बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को देखते हुए लगता है कि प्रदेश में अपराधियों ने डेरा डाल लिया है।अभी बीते शुक्रवार की रात उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में कोतवाली देहात क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कलवारी निवासी पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक तथा उसके साथी हिंदूवादी नेता पिंटू साहू की जलाकर हत्या कर दी गई थी।

पत्रकार की हत्या के बाद परिवार में रोष व्याप्त है। तो वही शव यात्रा के बाद पत्रकार की पत्नी विभा सिंह ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है। और यह भी कहा है कि मुझे पुलिस प्रशासन पर रत्ती भर भरोसा नहीं है। और साथ-साथ यह भी कहा है कि अगर हत्यारोपी अगर 2 दिन के अंदर गिरफ्तार नहीं किए गए तो वह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपनी दो बेटियों के साथ आत्मदाह कर लेंगी।


विभा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर और भी गमगीन आरोप लगाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन आखिर कब तक नींद से जागता है।वैसे तो सरकार बड़े-बड़े दावे करती है पत्रकारों को भी सुरक्षा को लेकर और पत्रकारों को न्याय दिलाने को लेकर लेकिन प्रदेश में हो रही पत्रकारों की हत्याये यह साबित करती हैं कि प्रदेश में पत्रकार आखिर कितने सुरक्षित हैं।

दो दिन के अंदर गिरफ्तार होंगे आरोपी : विधायक

पत्रकार की पत्नी विभा सिंह से मिलने पहुंचे क्षेत्रीय विधायक पलटू राम ने पत्रकार की पत्नी को यह आश्वासन दिया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी 2 दिन के अंदर की जाएगी।और साथ-साथ यह भी कहा है कि विवाह सिंह को नौकरी तथा बेटियों को आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। विधायक के आश्वासन के बाद पत्रकार का शव श्मशान घाट के लिए भारी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ।


अब देखने की बात है

सभी के आश्वासन और प्रशासन की मुस्तैदी अब तक दिखेगी जब आरोपी गिरफ्तार होंगे। क्योंकि हकीकत और दिखावे में बहुत फर्क होता है। अब देखना यह होगा कि बलरामपुर की पुलिस कब तक आरोपियों के पास पहुंच पाती है। क्योंकि जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया उससे यह जाहिर होता है कि प्रशासन का खौफ आखिर जनपद में कितना बचा है।

अब पत्रकार भी नहीं बचे सुरक्षित

बलरामपुर के राकेश सिंह निर्भीक के साथ जो हृदय विदारक घटना सामने आई है। उससे यह साबित होता है कि आखिरकार चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार भी अब सुरक्षित नहीं है। क्योंकि अगर जनता की बात प्रशासन या सरकार तक पहुंचा नहीं होती है। तो इसमें सबसे बड़ा योगदान पत्रकारों का ही रहता है। लेकिन पत्रकारों पत्रकारों के साथ बढ़ रही आपराधिक घटनाओं से यह मालूम होता है कि अब कलम की ताकत कमजोर होती जा रही है।

क्या है पूरी घटना

बीते शुक्रवार की रात्रि राकेश और उसके मित्र पिंटू साहू घर के कमरे में थे। और राकेश की पत्नी किसी रिश्तेदार के घर गई हुई थी तभी रात्रि में उनके कमरे में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कमरे की एक दीवार भी धमाके के साथ क्षतिग्रस्त हो गई। झुलसने के चलते पिंटू साहू की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची फायर सर्विस तथा पुलिस की टीम ने आग पर काबू पाया और राकेश को इलाज के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय ले गई।

अस्पताल में राकेश चीख-चीखकर कह रहा था कि वह एक बड़ी खबर लिख रहा था। इसी वजह से पंच व प्रधान आदि लोगों ने उसे जिंदा जला दिया। हालांकि उसने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया है। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। पुलिस ने उसे लखनऊ स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान राकेश ने भी दम तोड़ दिया। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि जिस कमरे में यह घटना हुई उस कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था। और तो और राकेश की पत्नी ने यह कहा कि वह ताला उसके घर का नहीं है।

वहीं पुलिस का कहना है कि घटना में टीमें गठित कर पड़ताल शुरू कर दी गई है साक्ष्यों को एकत्र कर घटना की जांच जा रही है। और जल्द से जल्द हम आरोपियों तक पहुंच जाएंगे।

रिपोर्ट : अनिल कुमार गुप्ता