बापट ने देश की आजादी के लिए छानी विदेशो में खाक

by shubham

हमीरपुर: किशनू बाबू शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर मे विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है, के तहत स्वतन्त्रता सन्ग्राम के अमर होता सेनापति पान्डुरन्ग महादेव बापट की जयन्ती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुये कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर भवानी दीन ने कहा की सेनापति महादेव बापट ने देश की आजादी के लिए जगह-जगह खाक छानी, बापट का देश के लिये महत्वपूर्ण योगदान रहा, बापट का जन्म 12 नवंबर 1880 को पारनेर महाराष्ट्र में हुआ था , इनके पिता का नाम महादेव और मां का नाम गंगाबाई था , यह 12 वर्ष की उम्र में पूना के न्यू इंग्लिश स्कूल हाई स्कूल में दाखिल हुए , इन्हें अच्छे अध्यापक और योग्य सहपाठी प्राप्त हुए, यह संस्कृत में बहुत विद्वान थे।

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इन्हें उस काल में ₹12 की छात्रवृत्ति मिली थी, बापट ने मुंबई से बी ए किया और एक छोटी सी नौकरी की, उसके बाद विदेश गए और वहां पर जाकर के देश की आजादी के लिए बहुत काम किया ।

7 वर्ष के काले पानी की सजा और 3 वर्ष की अलग सजा मिली

यह लंदन के इंडिया हाउस गए और वहां सावरकर से इनकी भेंट हुई ,उसके बाद बापट ने सौ वर्ष बाद का भारत पर एक लेख लिखा । इनके ही एक मित्र नरेंद्र गोस्वामी जो गौरो से मिल गया था और मुखबिर बन गया था ।उसे भी इनके एक मित्र ने मारा ,उसके बाद बापट देश के लिए काम करते रहे और 4 अगस्त 1920 को इनकी पत्नी का निधन हो गया, बापट ने शराबबंदी के लिए बहुत काम किया , उस योजना में महिलाओं को भी शामिल किया । मुंशी के सत्याग्रह में उन्हें सेनापति की उपाधि मिली , यह कई बार जेल गए। इन्हें 7 वर्ष के काले पानी की सजा और 3 वर्ष की अलग सजा मिली।


वे सुभाष चंद्र बोस से मिले, नासिक जेल में बन्द रहे । बापट ने संयुक्त महाराष्ट्र की स्थापना और गोवा मुक्ति आंदोलन में भी भाग लिया।28 नवंबर 1967 को मुंबई में उनका निधन हो गया । डॉ लालता प्रसाद ,आरती गुप्ता, देवेंद्र त्रिपाठी अखिलेश सोनी,प्रशांत सक्सैना , राकेश यादव, प्रदीप यादव, गणेश शिवहरे, रामप्रसाद शामिल रहै। संचालन डॉक्टर रमाकांत पाल ने किया।

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