बिलासपुर :- शनिवार को कांकेर में पत्रकार कमल शुक्ला और सतीश यादव पर हुए हमले के विरोध में मंगलवार को लॉकडाउन हटने के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब ने अपना विरोध दर्ज कराया, प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रेस क्लब के समक्ष मौन धरना दिया। जिसके बाद कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर आरोपियों की गिरफ्तारी और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए कदम उठाने की बात कही गई। खनन माफिया के खिलाफ रिपोर्टिंग करने और सोशल मीडिया पर उनकी कच्चा चिट्ठा उजागर करने से नाराज कांग्रेसी नेताओं ने शनिवार को पहले तो पत्रकार सतीश यादव के साथ मारपीट की फिर उनका समर्थन करने पहुंचे कमल शुक्ला को भी घसीट कर पीटा। पुलिस ने इस मामले में बेहद सामान्य धाराओं के तहत आरोपी गफ्फार मेमन, शादाब खान, जितेंद्र सिंह ठाकुर और गणेश तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया जिसके चलते वे थाने से ही छूट गए, तो वही पत्रकारों के खिलाफ भी पुलिस ने एफ आई आर दर्ज कर ली । लेकिन रविवार को मारपीट का वीडियो वायरल होते ही प्रदेश के साथ देशभर में इस घटना की निंदा होने लगी। शुरू में तो कांग्रेस ने भी आरोपियों के कांग्रेसी होने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में जिस तरह के सबूत सामने आए उससे स्पष्ट हुआ कि आरोपियों का कांग्रेस से गहरा रिश्ता है।

इसके बाद भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना लगाने में देर नही की। बताया जा रहा है कि करीब हमलावरों के 300 समर्थकों ने एक साथ थाने पर हमला कर दिया था, जिन्होंने पिस्तौल के साथ पत्रकारों को धमकाया और कमल शुक्ला के सर पर पिस्तौल से वार कर उनके सर पर भी चोट किया। इतना ही नहीं उनका गला रेतने की भी कोशिश की गई। उस वक्त बिलासपुर में लॉकडाउन होने के कारण बिलासपुर के पत्रकार प्रत्यक्ष रूप से घटना के विरोध में सामने नहीं आ पाए थे। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद मंगलवार को पत्रकारों ने इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है, साथ ही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग एक बार फिर उठाई गई।

रिपोर्ट-प्रकाश झा