Union budget 21 22
Photo : PIB/twitter

देश एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जहां वैश्विक महामारी से लड़ते लड़ते हम एक बार फिर से सफलता की ओर अग्रसर होते दिख रहे है। एक भारत श्रेष्ठ भारत का लक्ष्य लेकर मोदी सरकार एक बार फिर देशवासियो के लिए एक नई नीति बजट के रूप में लेकर आयी है।

बजट 2021-22 पिछले साल की तरह इस साल भी वित्त मंत्री सुबह संसद में पारंपरिक ‘बही-खाता’ के साथ पहुंची। बजट पेश करते ही निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह बजट तीन विषयों पर केंद्रित है, महत्वाकांक्षी भारत, आर्थिक विकास व ज़िम्मेदार समाज ।
निर्मला सीतारमण ने इस बजट को मुख्य रूप से हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रखा है। अपने भाषण की शुरुआत में वित्तमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के बाद सरकार कई मिनी बजट ला चुकी है, लेकिन यह आम बजट मुख्य रूप से छह प्रमुख स्तंभ पर आधारित होगा।

पर्यावरण के लिहाज से ख़ास है इस बार का बजट

वित्त मंत्री ने अपने बजट में कई बड़े ऐलान किए। सरकार की ओर से नई एग्री इन्फ्रा डेवलपमेंट सेस को 2 फरवरी से लागू करने का ऐलान किया गया है, साथ ही क्रूड पाम ऑयल पर 17.5 फीसदी, क्रूड सोयाबीन, सनफ्लावर पर 20 फीसदी टैक्स लागने की बात कही है। पेट्रोल पर 2.5 रूपये और डीजल पर चार रुपए एग्री इन्फ्रा सेस लगाने का प्रस्ताव भी सरकार ने इस बजट में रखा है। वित्त मंत्री ने 75 वर्ष से अधिक आयु वालों को आयकर रिटर्न भरने से छूट दी है, बशर्ते उनकी आय सिर्फ पेंशन हो। आम नागरिकों के लिए आयकर स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

राजकोषीय घाटा कम करने का है लक्ष्य

मौजूदा वित्त विर्ष में राजकोषीय़ घाटा 9.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह 6.8 फीसदी रहेगा, ऐसा अनुमान लगाया गया है। वित्त मंत्री ने एग्री क्रेडिट लक्ष्य को भी बढ़ाने का ऐलान किया है, इसमे अब कुल 16.5 लाख करोड़ रुपए तक कर दिया गया है। शहरी इलाकों में यातायात की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सरकार ने 18000 करोड़ रुपए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए आवंटित किए हैं, जबकि दिसंबर 2021 तक ब्रॉड गेज रेलवे की लाइनों के विद्युतीकरण का भी ऐलान किया गया है।

इस बजट से ये अनुमान लगाया जा रहा हे ,देश अपनी अर्थव्यवस्था की सही गति से अब पटरी पर दुबारा उतरेगा। मोदी सरकार अपने नए भारत के लक्ष्य की ओर देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब सम्पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है ।
MSME – जो देश की GDP में लगभग 29% योगदान करती है, उसको सम्पूर्ण रूप से मैन्युफ़ैक्चरिंग की एक नयी रूप रेखा बनायी गयी ।

विश्व स्तर पर भारत पर सभी देशों की नज़र है हाल ही में नोडल एजेंसी द्वारा भारत को एक रेज़िल्यंट देश के तौर पर देखा जा रहा है, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश हर तरह की दिक़्क़तों का सामना करने में शशक्त रूप से प्रतिबंध है ।

राष्ट्रीय निर्माण की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ शासन व प्रशासन की नहीं होती हम प्रत्येक नागरिक को भी बराबरी से खड़ा होना पडेगा। आत्मनिर्भर सिर्फ़ शब्द नहीं एक मंत्र है जिसे हमें अपनी कार्यशैली में ढालना पड़ेगा।

अंकित अरोरा
राजनीतिक विश्लेषक