देश का अन्नदाता जब आंदोलन पर उतर जाए समझो कुछ गम्भीर सा हो चला है । ये ही स्थिति हो चली है हमारे किसान भाइयों के साथ।

हमारे देश का अस्तित्व आज भी जय जवान और जय किसान के गूंज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है । ये अपने आप में ही बहुत दुर्भाग्यपूर्ण विषय है कि भारत सरकार के द्वारा लाई हुई इस कृषि क्रांति को एक ग़लत संदर्भ में बरगलाया जा रहा है ।
आज के विषय मे अपने आँकलन के साथ , मैं आपके समक्ष कुछ ऐसे सत्य और भ्रम प्रकट करूँगा जो कि हर ज़िम्मेदार नागरिक को जानना अनिवार्य है।

  1. भ्रम– किसानो के बीच ये भ्रम फलाया गया है की भारत सरकार द्वारा जो MSP का संदर्भ रखा गया है उससे MSP ख़त्म हो जाए गी।
    सत्य- भारत सरकार द्वारा लाए गए बिल में MSP का उल्लेख(AGREEMENT on Price Assurance & Farm Service Act 2020 -POINT NUMBER 5 ) है। इसके अलावा किसानो के पास अपने उपज को निजी कंपनियों को बेचने के विकल्प भी होगे।
  2. भ्रम- बड़े कॉर्पोरेट्स को फ़ायदा होगा और वे किसानो से ज़मीन कॉंट्रैक्ट फ़ार्मिंग के अंतर्गत छीन लेंगे।
    सत्य- भारत सरकार द्वारा लाया गया नया विधेयक भूमि सुरक्षा को सुनिश्चित करता है और भूमि की बिक्री करना और रखना प्रतिबंधित करता है साथ ही किसान की ज़मीन का उत्तरदायित्व किसी को लेना भी प्रतिबंधित करता है।
  3. भ्रम- किसानो को पिछली सरकार की तुलना में अब कम MSP मिलेगा।
    सत्य- UPA की तुलना में भारत सरकार आज अधिकतम दर पर MSP दे रही है। गेहूं की ख़रीद पर २००% की वृद्धि और धान की ख़रीद पर 250% की वृद्धि दी जा रही है।
    भारत सरकार ने NDA के दौर पर 50000 crore की दलहन की ख़रीद की है | जहां UPA के दौर में 650 करोड़ की दलहन की ख़रीद हुई।

मंडियों का डिजिटलीकरण

सोचने वाली बात ये है अगर मोदी सरकार MSP को ख़त्म करना चाहती है तो क्यों सरकार MSP के दामों को साल दर साल उसे अधिकतम दर पर ले जा रही है।

इन सब विरोध के पीछे जो राजनीति की जा रही है जिससे हमारे भोले भाले कर्मठ किसान भाइयों को बरगलाया गया है वो अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

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अगर मोदी सरकार को मंडियों को ख़त्म ही करना था तो E-NAM पर १००० से ज्यादा मंडियो को रजिस्टर व डिजिटल क्यों करती।
इसलिए मेरा किसान भाइयों से निवेदन है कि सरकार के साथ बैठ कर इस मुद्दे का बीच का रास्ता निकाले और ये विरोध के माहौल को ख़त्म करे।
आप किसानो के बीच बहुत ही वरिष्ठ किसान भाई भी हैं | जिनका स्वास्थ एक और गम्भीर विषय है हम सब के लिए ।

जय जवान जय किसान

अंकित अरोड़ा
राजनीतिक विश्लेषक व
Senior columnist