सहकारिता विभाग : भर्ती घोटाले में दोषियों के विरुद्ध जल्द हो सकती है एफआईआर

by News Desk
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उत्तर प्रदेश :- सपा शासनकाल में सहकारिता विभाग में हुई भर्तियों का ‘खेल’ तो पहले ही उजागर हो चुका है। अब जल्द ही उसके दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आसार हैं। यूपी कोआपरेटिव बैंक में सहायक प्रबंधक के 53 पदों पर हुई भर्तियों में व्यापक अनियमितता पाई गई है। शासन की औपचारिक मंजूरी मिलते ही प्रदेश पुलिस की एसआईटी आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करेगी।

सूत्रों के अनुसार शासन के गृह विभाग में एसआईटी की रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई के बारे में फैसला लिया जा चुका है। एसआईटी को इस बैठक का कार्यवृत्त मंजूर होने का इंतजार है। इसके जारी होते ही एसआईटी इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लेगी। एसआईटी ने जांच में भर्तियों में हुई अनियमितता का मामला उजागर करते हुए गृह विभाग से मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराने की संस्तुति की थी।

सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में यूपी कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन एमडी और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष के अलावा निबंधक सहकारिता के कार्यालय के कुछ अधिकारियों का भी नाम हैं। आरोपी अफसरों को निर्धारित अर्हता में नियम विरुद्ध ढंग से बदलाव करने तथा परीक्षा एजेंसी के माध्यम से ओएमआर शीट में हेराफेरी कराने में दोषी बताया गया है।

अन्य पदों पर भर्तियों की जांच जारी :
एसआईटी अन्य पदों पर भर्तियों की जांच अभी कर रही है। जल्द ही वह अपनी दूसरी रिपोर्ट भी शासन को भेज सकती है। दरअसल वर्ष 2012 से 2017 के बीच सहकारिता विभाग में 49 तरह के पदों के लिए कुल 2391 रिक्तियां विज्ञापित हुई थीं, जिसमें से 2343 पदों पर भर्तियां कर ली गई थीं। ये पद राज्य भंडारण निगम, पीसीएफ, सहकारी ग्राम विकास बैंक, यूपी कोऑपरेटिव विकास बैंक, यूपी कोऑपरेटिव यूनियन, जिला सहकारी बैंक, सहकारी ग्राम विकास बैंक व यूपीआरएनएन (पूर्व नाम पैक्सफेड) आदि सहकारी संस्थाओं में रिक्त थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2018 में इन भर्तियों की जांच शुरू हुई।

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