वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए देश में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। महामारी से बचने के लिए वैक्सीन बनाकर विश्व में देश के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर कीर्तिमान स्थापित किया ही है। तो वही उत्तर प्रदेश के कानपुर में कई अस्पताल वैक्सीन का ट्रायल कर नया कीर्तिमान बना चुके हैं। एक बार फिर इसको कोरोना की तीसरी लहर की चपेट में आने से बच्चों को बचाने के लिए को वैक्सीन के ट्रायल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड , इंडियन काउंसिल ऑफ इंडिया मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर हैदराबाद ने स्वदेशी को वैक्सीन की ट्रायल की जिम्मेदारी देश के छः अस्पतालों को सौंपी है। सबसे पहले एम्स दिल्ली में ट्रायल शुरू हुआ है तो वही कानपुर समेत देश के पांच (एम्स दिल्ली, एम्स पटना, निजाम इंस्टीट्यूट हैदराबाद , बेलग्राम) संस्थानों पर ट्रायल प्रक्रिया शुरू हो चली है।

ऐसे किया गया वैक्सीन का ट्रायल

भारत बायोटेक की को-वैक्सीन ने बच्चों पर ट्रायल शुरू किया है। कानपुर के प्रखर हॉस्पिटल में बीते मंगलवार से बच्चों पर ट्रायल शुरू किया गया था। वैक्सीन ट्रायल के लिए बच्चों को तीन ग्रुप में बांटा गया है। पहले ग्रुप में दो साल से छह साल, दूसरे ग्रुप में 6 साल से 12 साल और तीसरे ग्रुप में 12 साल से 18 साल के बच्चों को रखा गया है।

वैक्सीन ट्रायल के पहले दिन 12 साल से 18 साल के 40 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 20 बच्चे वैक्सीन के लिए फिट पाए गए। उन बच्चों को वैक्सीन लगा दी गई। बीते बुधवार को छह साल से 12 साल के 10 बच्चों का पहले मेडिकल चेकअप किया गया। जिसमें से वैक्सीन के लिए 5 बच्चे फिट पाए गए। उन्हें भी वैक्सीन लगा दी गई। इसके बाद 45 मिनट तक बच्चों को आब्जर्वेशन में रखा गया। जिसमें से दो बच्चों के इंजेक्शन लगने वाले स्थान पर हल्के से लाल निशान पड़े थे, जिसे सामान्य बात मानी जाती है।