कुछ दिनों पहले एक गाना ट्रेंड करा था कि “सखी सैंया तो खूबई कमाऊत हैं , महंगाई डायन खाए जाऊत है” यह गाना और 2014 में किया गया प्रदर्शन महंगाई की याद बरकरार रखता है। गाने में तो महंगाई का जिक्र किया ही गया था लेकिन 2014 में गले में कद्दू सामने सिलेंडर रखकर जो धुआंधार प्रदर्शन हुआ था उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो देश की महंगाई यह लोग जड़ से खत्म कर देंगे।

इन तस्वीरों का और बढ़ती महंगाई का चोली-दामन का साथ है बढ़ती धुआंधार महंगाई। कहते हैं कि भारत की मासूम जनता को तेरी तस्वीरों ने लूट लिया और भावुक होकर जनता ने महंगाई कम करने के लिए सिलेंडर वालों को चुन लिया। अब लेकिन चुनाव उल्टा पड़ गया। जिस दिन सिलेंडर के साथ प्रदर्शन किया था, उस दिन से लेकर आज तक सिलेंडर के दामों में कमी तो ना हुई लेकिन दाम सातवें आसमान पर पहुंच चुके हैं।

लेकिन इन तस्वीरों को देखने से लगता है। कि पहले की राजनीति और अब की राजनीति में बहुत बड़ा फर्क आ गया है पहले चुनाव मुद्दों पर लड़ा जाता था और अब लग रहा है चुनाव नेताओं को कोस कोस कर लड़ा जाता है। जब भाजपा विपक्ष में थी। तब कांग्रेस सरकार को महंगाई और बढ़ते पेट्रोल के दाम पर कोस कोस कर राजनीति कर रही थी। भारतीय जनता पार्टी के सभी दिग्गज बढ़ती महंगाई और पेट्रोल के दाम पर खूब बवाल करते सड़कों पर दिखाई दिए थे।



लेकिन लगता है सत्ता में आने के बाद किए हुए वादे और साथ-साथ सड़कों वाला प्रदर्शन भी किसी को याद नहीं रहा। कहां गया था कि देश का विकास होगा अच्छे दिन आएंगे। लेकिन विकास का तो पता नहीं जनता की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी ने हाल ही में स्मृति ईरानी की एक फोटो अपने ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा है। शायद राहुल गांधी बढ़ते विकास पर भाजपा सरकार से सिलेंडर वाले प्रदर्शन को याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना यह है कि महंगाई की दुहाई देकर सत्ता हासिल करने वाली पार्टी को आखिर कब तक जनता का प्यार मिलता है। क्योंकि बढ़ती महंगाई की आह अब जनता को देखने लगी है।