गोरखपुर : इस कोरोना काल के दौरान ना जाने कितने परिवारों के ऊपर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। इस कोरोना ने किसी का पिताजी दूर किया तो किसी की मां की ममता उससे छीन ली। जब तक सर पर पिता का हाथ होता है तब तक जिंदगी का बोझ हल्का होता है। लेकिन आज एक ऐसा वाकया सामने आया जिसे जिसने भी सुना उसका दिल भर गया। मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से है जहां कोरोना संक्रमण के कारण पिता की मृत्यु के बाद जब पुत्र उनको दफनाने गया तो बेटे ने रोते हुए गले से कहा कि मेरे पापा चले गए उनको दादी की कब्र के पास ही दफनाया है। क्योंकि अगर पापा रात में घबरा आएंगे तो दादी उन्हें संभाल लेंगी। आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण पिता अफताब अहमद जोकि गोरखपुर के सहारा एस्टेट के रहने वाले थे उनकी मृत्यु हो गई। अफताब अहमद पेशे से इंजीनियर थे। मृत्यु के बाद जब उनका बेटा उनको दफनाने के लिए गया तो उसने जो कहा उसे सुन सभी के दिल भर आए।



बेटे ने रोधी गले से बताया कि पहली रमजान मुबारक हो पापा को बुखार हुआ खांसी आने लगी। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें भर्ती कराना चाहा लेकिन कोविड में मरीजों की अधिकता के कारण किसी भी अस्पताल में जगह नहीं मिली। उनकर ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरता रहा अंत में 20 अप्रैल को एक निजी अस्पताल में बेड मिला वहां कोरोनावायरस कराई गई बुधवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बेटे ने बताया कि दिक्कत यह हुई कि अस्पताल में कोविड मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं थी। बेटे ने आंखों में आंसू भरते हुए आपबीती बताई की उचित इलाज ना मिलने के कारण आज हमारे पापा मेरे साथ नहीं है।

जब सुख के दिन आए तो पापा नहीं रहे


अफताब अहमद पेशे से इंजीनियर थे और दुबई की बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियरिंग के पद पर थे उन्होंने 2016 में रिटायरमेंट ली थी। अफताब के दो बेटे हैं दानिश और हैदर दानिश भी आईटी इंजीनियर है और गुरुग्राम की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं जबकि छोटा बेटा हैदर भी इंजीनियर है और गुरुग्राम में भाई के साथ ही रह कर जॉब कर रहा है। आंखों में आंसू भर दानिश कहते हैं कि पापा ने बहुत मेहनत करके हम लोगों को बेहतरीन तालीम दी लेकिन जब हमें उनकी खिदमत करने का समय आया तब उन्होंने यह मौका हमें नहीं दिया पापा अचानक हमें छोड़ कर चले गए। दानिश ने बताया कि पापा अपनी अम्मी यानी कि मेरी दादी से बहुत प्यार करते थे। इसीलिए कब्रिस्तान में हमने उन्हें दादी के पैरों के पास ही जगह दिलाई, ताकि कयामत तक पापा दादी का साथ रहे।