बाबरी विध्वंस मामले में 30 सितंबर को आएगा आखिरी फैसला

by vaibhav

बाबरी मस्जिद विध्वंस का मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ चुका है। इस विवाद पर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट आने वाली 30 सितम्बर को अपना फैसला सुनाने जा रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने के बाद जितनी भी एफआईआर दर्ज हुई हैं उस पर विशेष न्यायालय (अयोध्या प्रकरण) के जज सुरेंद्र कुमार यादव अपना आखिरी फैसला सुनाने वाले हैं।

इस मामले को दो भागों में बांटा गया था। पहला मुद्दा भूमि विवाद से जुड़ा है जिसको सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई द्वारा सुलझा लिया गया था। दूसरा मामला आपराधिक साजिश का है जिसकी सुनवाई जज सुरेंद्र कुमार यादव के अध्यक्षता में होगी।

इस मुक़दमे की अहमियत कितनी ज्यादा है इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इस मुकदमे के दौरान जज सुरेंद्र कुमार यादव की अदालत ने बीजेपी के कई नेताओं को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत कुल 32 अभियुक्तों को पेश होने के लिए कहा गया है।

कौन है जज सुरेंद्र कुमार यादव?

10 सितंबर 1959 को जौनपुर, उत्तर प्रदेश में जन्म हुआ। सुरेंद्र कुमार यादव 31 साल की उम्र में राज्य न्यायिक सेवा के लिए चुने गए थे।

1990 से फ़ैज़ाबाद में एडिशनल मुंसिफ़ के पद की पहली पोस्टिंग से उनका न्यायिक जीवन शुरू हुआ। इसके ग़ाज़ीपुर, हरदोई, सुल्तानपुर, इटावा, गोरखपुर से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज़िला जज के पद तक पहुंचे।

पिछले साल उनका सेंट्रल बार एसोसिएशन ने फेयरवेल किया था क्योंकि लखनऊ जिला जज के पद से वह सेवामुक्त हो हुए थे।

लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिटायरमेंट की अवधि बढ़ा दी थी और उन्हें विशेष न्यायालय (अयोध्या प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी के पद पर बने रहकर बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की सुनवाई पूरी करने के लिए कहा। जिला जज के रूप में रिटायर होने के बाद अब वह विशेष न्यायाधीश हैं।

रिपोर्ट : मानसी शर्मा

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