सुपौल :- अलग अलग जगहों पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की सलामती औऱ उनके स्वस्थ व दीर्घायु जीवन के लिए वटवृक्ष की पूजा अर्चना किए।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो सुहागिन महिलाएं इस व्रत को सच्ची श्रद्धा के साथ करती है, उसे न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति के सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं।गुरुवार को सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान से अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना के साथ अखंड सौभाग्य व परिवार की सलामती के लिए उपवास रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना किए। 

इस दिन सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए  बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर उस पर सुरक्षा का धागा बांधकर पति की लंबी उम्र की प्रार्थना भगवान से किए। पंडित सुभाष झा ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत बेहद खास और महत्वपूर्ण होता है,

इसे सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य की कामना और संतान प्राप्ति की दृष्टि से बहुत ही शुभ व फलदायी होता है। इस बार वट सावित्री अमावस्या पर शुक्र ग्रह की वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, और राहु यह चारों ग्रह एक साथ विराजमान रहा। वहीं उपवास रखकर पति की सलामती स्वस्थ व दीर्घायु जीवन के लिए वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर रही सुहागिन ज्योति किरण,रजनी सरोज,ब्यूटी रानी,जूली प्रभा,प्रियंका प्रिया, पिंकी चौधरी,पूजा कुमारी रेखा देवी आदि महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे बैठकर इससे संबंधित कथा को ध्यान लगाकर सुना।

औऱ बताई कि कथा है कि सावित्री के पति सत्‍यवान की मौत हो गई थी। अपने पति का प्राण वापस लाने के लिए बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति के प्राण लौटा दिए थे। इसीलिए इस व्रत को वट सावित्री व्रत कहा जाने लगा। इस दिन बरगद के वृक्ष को जल से खींच कर उसमें कच्चे सूत लपेटते हुए उनकी परिक्रमा की जाती है। जिससे पति की आयु में वृद्धि होती है।

रिपोर्ट :- संतोष कुमार