गणपति स्पेशल : जानिए तीन खण्ड के मकान जैसे स्वरूप वाले मंदिर का रहस्य

by News Desk
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कानपुर। शहर के #घंटाघर इलाके में मौजूद #गणेश मंदिर पूरे #यूपी का ऐसा इकलौता मंदिर है जिसका स्वरुप एक तीन खंड के मकान जैसा है। इसके साथ ही यहां भगवान गणेश के 10 रूप एक साथ मौजूद है। कहते है यहां भगवान गणेश का मंदिर बनने के दौरान अंग्रेजों ने रोक लग दिया था। क्योकि इस मंदिर के 50 मीटर की परिधि में एक मस्जिद मौजूद था। जिस पर अंग्रेज अधिकारियों का तर्क था कि मस्जिद और मंदिर एक साथ नहीं बन सकते। ऐसे में यहां मंदिर बनवाने के बजाय 3 खंड का मकान बनवाकर भगवान गणेश को स्थापित किया गया था।

व्यापारी ने रखी थी इसकी नींव –

  • शहर के घंटाघर इलाके में मौजूद गणेश मंदिर में गणेश उत्सव की तैयारी पूरे जोरशोर से चल रही है। मगर इस मंदिर की स्थापना की अजीबो गरीब कहानी है।
  • मंदिर की देखभाल करने वाले खेमचन्द्र गुप्त ने कहा, ”मेरे बाबा के कुछ महाराष्ट्र के व्यापारिक दोस्त थे जो ज्यादातर व्यापार के सिलसिले में गणेश उत्सव के समय कानपुर आया करते थे।”
  • ”इन लोगों की भगवान गणेश में अटूट आस्था थी और वो भी उस समय गणेश महोत्सव के समय घर में ही भगवान गणेश के प्रतिमा की स्थापना कर पूजन करते थे, और आखि‍री दिन बड़े ही धूमधाम से विसर्जन करते थे।”
  • ”उनदिनों पूरे कानपुर में यहां अकेले गणेश उत्सव मनाया जाता था। इनकी भक्ति को देख इनके महाराष्ट्र दोस्तों ने उस खाली प्लाट में भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित कर वहा मंदिर बनवाने का सुझाव दिया था।”
  • ”बाबा रामचरण के पास एक 90 स्क्वायर फिट का प्लाट घर के बगल में खाली पड़ा था। जहां इन्होंने मंदिर निर्माण करवाने के लिए 1908 में नीव रखी थी।”

1921 में बाल गंगाधर तिलक ने किया था भूमि पूजन –

  • ”1908 में जब बाल गंगाधर तिलक जी कानपुर आए तब बाबा ने उनके सामने गणेश मंदिर की स्थापना की बात कही। उस समय बाल गंगाधर ने अपनी व्यस्तता को लेकर अगली बार आकर भूमि पूजन करने के साथ गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना करने की बात कही थी।”
  • ”मगर बाल गंगाधर तिलक को कानपुर आने में करीब तेरह साल लग गए, और इनकी बाबा की जिद थी कि भूमि पूजन के साथ गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना वो उन्ही से करवाएंगे।”
  • ”1921 में बाल गंगाधर ने इस मंदिर में गणेश प्रतिमा की स्थापना के लिए स्पेसल कानपुर आए थे। तिलक जी ने यहां भूमि पूजन तो कर दी मगर मूर्ति स्थापना नहीं कर पाए क्योकि पूजन के बाद किसी आवस्यक काम की वजह से उनको जाना पड़ा।”

अंग्रेज अधिकारियों ने लगाई थी रोक –

  • ”जब अंग्रेज सैनिको को यहां मंदिर निर्माण और गणेश जी की मूर्ति के स्थापना की जानकारी मिली तो उन्होंने मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी। अंग्रेज अधिकारियों ने इसके पीछे तर्क दिया कि पास में मस्जिद होने के कारण यहां मंदिर नहीं बनवाया जा सकता है। क्योंकि कानून के मुताबिक़ किसी भी मस्जिद से 100 मीटर के दायरे में किसी भी मंदिर का निर्माण नहीं किया जा सकता।”
  • ”अंग्रेज अधिकारियों के मना करने के बाद रामचंद्र ने कानपुर में मौजूद अंग्रेज शासक से मुलाक़ात की मगर बात नहीं बनी। इसकी जानकारी बाल गंगाधर तिलक को हुई तब उन्होंने दिल्ली में अंग्रेज के बड़े अधिकारी से मिले और मंदिर स्थापना के साथ मूर्ति स्थापना की बात कही।”
  • ”इसपर दिल्ली से 4 अंग्रेज अधिकारी कानपुर आए और स्थिति का जायजा लिया था। अंग्रेज अधिकारी ने वहां गणेश प्रतिमा की स्थापना करने की अनुमति तो दी मगर इस प्लॉट पर मंदिर निर्माण की जगह दो मंजिला घर बनावाने की बात कही। ऊपरी खंड पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने को कहा।”
  • ”जिसके बाद यहां 2 मंजिला घर बनाया गया और पहले तल पर भगवान गणेश की प्रतिमा को रामचरण गुप्त ने स्थापित किया। इस 3 मंजिल खंड में निचे वाले खंड पर ऑफिस और आने वाले श्रद्धालुओं के जूते चप्पल रखने का स्थान दिया गया।”
  • ”पहले तल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है। जबकि दूसरे ताल पर भगवान गणेश के 9 अवतार रूपी मूर्ति के साथ एक 10 सि‍र वाले गणेश जी रखे गए।”

मंदिर में है भगवान गणेश के बेटे भी –

  • इस मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की संगमरमर के पत्थर के मूर्ति के अलावा उनके सामने पीतल के गणेश भगवान के साथ उनके बगल में ऋद्धि और सिद्धि को भी स्थापित किया गया है।
  • इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां भगवान गणेश के दोनों बेटे शुभ – लाभ को भी स्थापित किया गया है। इसके अलावा दूसरे खंड पर भगवान गणेश के नौ रूप को पुजारियों के कहने पर स्थापित किया गया था।
  • इसके अलावा इस मंदिर में भगवान गणेश का एक मूर्ति ऐसा है जिसमे दशानन की तरह दस सिर लगे हुए है।

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